वृंदावन। भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली मंगलवार सुबह पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के सत्संग में भाग लिया। सुबह करीब 6 बजे दोनों आश्रम पहुंचे और लगभग एक घंटे तक आम श्रद्धालुओं के साथ बैठकर सत्संग सुना। इस दौरान दोनों हाथ जोड़कर शांत भाव से प्रवचन सुनते रहे। बाद में उन्होंने महाराज से आशीर्वाद लिया।

बताया गया कि विराट और अनुष्का सोमवार शाम दिल्ली से कार द्वारा वृंदावन पहुंचे थे और एक होटल में रात्रि विश्राम किया। मंगलवार सुबह वे फॉर्च्यूनर गाड़ी से आश्रम पहुंचे। आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार दोनों समय से पहले ही पहुंच गए थे और बिना किसी विशेष व्यवस्था के सामान्य भक्तों की तरह सत्संग में शामिल हुए। सत्संग के बाद वे दिल्ली लौट गए।

आश्रम के बाहर उनकी गाड़ी कुछ देर के लिए जाम में फंस गई। जैसे ही प्रशंसकों को विराट के वहां होने की जानकारी मिली, बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने उमड़ पड़े। पुलिस ने करीब 15 मिनट की मशक्कत के बाद जाम खुलवाया।
दीक्षा और पूर्ण शरणागति पर प्रवचन
सत्संग के दौरान प्रेमानंद महाराज ने ‘दीक्षा’ और ‘पूर्ण शरणागति’ के अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि दीक्षा, पूर्ण शरणागति की पहली सीढ़ी है। सच्ची शरणागति वही है, जब व्यक्ति अपने इष्ट के अतिरिक्त किसी और को सर्वोच्च स्थान न दे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अर्जुन पूर्ण शरणागत थे, तभी भगवान स्वयं उनके जीवन का संचालन कर रहे थे।

16 दिसंबर को विराट और अनुष्का के गले में तुलसी कंठी माला दिखाई दी थी, जिसके बाद चर्चा हुई कि उन्होंने दीक्षा ले ली है। हालांकि आश्रम की ओर से इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की गई थी। उस दौरान अनुष्का ने कहा था, “महाराज जी, हम आपके हैं और आप हमारे।” इस पर महाराज ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम सब श्रीजी के हैं, आनंदपूर्वक रहो और भगवान के आश्रित रहो।”

पहले भी कर चुके हैं दर्शन
14 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद भी विराट अनुष्का के साथ आश्रम पहुंचे थे। तब दोनों करीब 2 घंटे 20 मिनट तक वहां रहे थे। महाराज ने उन्हें नाम जप और साधना का महत्व बताया था।
10 जनवरी 2025 को भी परिवार सहित आश्रम पहुंचे विराट ने असफलता से उबरने का मार्ग पूछा था। इस पर महाराज ने कहा था, “अभ्यास जारी रखें, जीत निश्चित है। जैसे मेरे लिए नाम जप साधना है, वैसे ही आपके लिए क्रिकेट साधना है।”
वृंदावन की इस यात्रा ने एक बार फिर दिखाया कि प्रसिद्धि और व्यस्तता के बीच भी यह दंपति आध्यात्मिक जुड़ाव को महत्व देता है।