वीआईपी भोज के बाद बच्चों को साधारण भोजन !

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छतरपुर जिले की शासकीय माध्यमिक शाला नारायणपुरा में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित सहभोज और उसके अगले दिन बच्चों को परोसे गए भोजन में बड़ा अंतर सामने आया है। 26 जनवरी को जब जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जनप्रतिनिधि स्कूल पहुंचे, तो भोजन की थाली में शुद्ध घी के लड्डू, बिसलेरी पानी समेत करीब 10 प्रकार के व्यंजन परोसे गए। वहीं, वीआईपी मेहमानों के जाने के अगले ही दिन 27 जनवरी को स्कूल में बच्चों को फिर वही रूटीन सरकारी मेनू—सब्जी, पूड़ी और खीर—दी गई।

जानकारी के अनुसार, गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित सहभोज में अधिकारियों के स्वागत के लिए शाही मेनू तैयार किया गया था। थाली में बिसलेरी मिनरल वाटर, शुद्ध घी के लड्डू, दही-रायता, पापड़, सलाद, चुकंदर, सादा व पालक पूड़ी, कचौड़ी, छोले, मिक्स वेज सब्जी, बालूशाही और खीर परोसी गई। इसके अलावा अधिकारियों के हाथ धोने के लिए मिनरल वॉटर टैंक, हैंडवॉश और सफेद टॉवेल नैपकिन तक की व्यवस्था की गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, इस एक दिन के वीआईपी भोज पर करीब 1 लाख रुपए का खर्च आया है। यह खर्च किस मद से और किस अनुमति से किया गया, इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं।

अगले दिन बदला नज़ारा

27 जनवरी को स्कूल का नज़ारा पूरी तरह बदल गया। वीआईपी मेहमानों के न होने पर बच्चों को तय सरकारी मिड-डे मील मेनू के अनुसार केवल सब्जी, पूड़ी और खीर दी गई। स्कूल स्टाफ ने बताया कि यही नियमित व्यवस्था है और बच्चों को प्रतिदिन यही भोजन दिया जाता है।

छात्रों ने बताया कि 26 जनवरी को मिला भोजन स्वादिष्ट और विविधता से भरपूर था। बच्चों का कहना है कि उन्हें ऐसा पौष्टिक और अच्छा खाना रोज़ मिलना चाहिए।

पूरा प्रशासन रहा मौजूद

गणतंत्र दिवस के सहभोज में जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (एसपी), विधायक, नगरपालिका अध्यक्ष, अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी), जिला पंचायत सीईओ, अपर कलेक्टर, एसडीएम, सीएसपी, तहसीलदार, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे।

उठ रहे हैं सवाल

इस पूरे मामले ने सरकारी स्कूलों में भोजन व्यवस्था और दोहरे मापदंडों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यदि एक दिन बच्चों को इतना अच्छा भोजन दिया जा सकता है, तो फिर रोज़ क्यों नहीं। वहीं, सरकारी राशि के उपयोग और प्राथमिकताओं को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

फिलहाल इस मामले में शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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