सागर। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में नर बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व से लाए गए करीब 33 माह उम्र के एक नर बाघ को सुरक्षित रूप से खुले जंगल में छोड़ दिया गया है। इस बाघ को कान्हा और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व प्रबंधन के आपसी समन्वय से शिफ्ट किया गया है। बाघ के रिलीज होने के साथ ही टाइगर रिजर्व में बाघों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 27 हो गई है।
टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार यह बाघ पहली बार खुले जंगल में अपनी दहाड़ सुनाएगा और अब अपनी स्वतंत्र टेरेटरी स्थापित करेगा। यह न केवल बाघों की संख्या बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि रिजर्व के पारिस्थितिकी संतुलन को भी मजबूत करेगा।

बताया गया कि अप्रैल 2023 में यह शावक सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ परिक्षेत्र में अपनी मां से बिछड़ा हुआ मिला था। उस समय उसकी उम्र केवल 4 से 5 माह थी। कई प्रयासों के बावजूद उसकी मां का पता नहीं चल सका, जिसके बाद उसे कान्हा टाइगर रिजर्व के घोरेला रिवाइंडिंग बाड़े में शिफ्ट किया गया। यहां करीब 33 माह तक उसकी देखरेख, प्रशिक्षण और प्राकृतिक शिकार कौशल का विकास किया गया।
बाड़े में प्रशिक्षण के दौरान बाघ को इस तरह तैयार किया गया कि वह जंगल में स्वयं शिकार कर सके और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप जीवन जी सके। प्रशिक्षकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की निगरानी में बाघ ने सफलतापूर्वक शिकार करना सीख लिया, जिसके बाद उसे खुले जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया गया।

शिफ्टिंग से पहले वन्यप्राणी चिकित्सकों और वैज्ञानिकों की टीम ने बाघ को ट्रेंकुलाइज कर उसका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। सभी मानकों पर फिट पाए जाने के बाद सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से उसे सैटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाया गया और फिर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में सुरक्षित रूप से रिलीज किया गया।
प्रबंधन ने बताया कि सैटेलाइट कॉलर आईडी के माध्यम से बाघ की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बाघ नियमित रूप से शिकार कर रहा है, किसी मानव बस्ती की ओर न जाए और अन्य बाघों के साथ किसी प्रकार का संघर्ष न हो। वन विभाग की टीम लगातार उसकी मॉनिटरिंग करेगी ताकि वह जंगल में सफलतापूर्वक अपना जीवन शुरू कर सके।