सागर/दमोह। मध्यप्रदेश वन विभाग के निर्देशानुसार वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 20 फरवरी 2026 से 22 फरवरी 2026 तक गिद्धों की संख्या का आकलन किया गया। तीन दिवसीय इस सर्वेक्षण का उद्देश्य टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों की कुल संख्या, उनकी प्रजातियों की उपस्थिति तथा संरक्षण की स्थिति का मूल्यांकन करना था।
वन अमले एवं विशेषज्ञों की संयुक्त टीमों ने निर्धारित बीट और रूट पर जाकर गिद्धों की गणना की। सर्वेक्षण के दौरान ऊँचे पेड़ों, चट्टानी इलाकों एवं जलस्रोतों के आसपास विशेष निगरानी रखी गई।
सात प्रजातियाँ दर्ज, कुल 2536 गिद्धों की उपस्थिति

वर्ष 2026 के गिद्ध सर्वेक्षण में कुल सात प्रजातियाँ दर्ज की गईं और कुल 2536 गिद्धों की गणना की गई।
इनमें—
- भारतीय गिद्ध (लॉन्ग बिल्ड गिद्ध) की संख्या सर्वाधिक पाई गई।
- व्हाइट रंप्ड गिद्ध दूसरे स्थान पर रहे।
- इजिप्शियन गिद्ध की संख्या मध्यम स्तर पर दर्ज की गई।
- लाल सिर वाले गिद्ध अपेक्षाकृत कम संख्या में मिले।
इसके अतिरिक्त, प्रवासी प्रजातियों में यूरेशियन ग्रिफॉन, हिमालयन ग्रिफॉन और सिनेरियस गिद्ध की उपस्थिति भी दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत है।
पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अहम भूमिका
वन अधिकारियों ने बताया कि गिद्ध पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पक्षी हैं। वे मृत पशुओं के अवशेषों को शीघ्रता से साफ कर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों की उल्लेखनीय संख्या इस बात का संकेत है कि यहां का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित एवं सुरक्षित है। वन विभाग द्वारा लगातार संरक्षण उपाय, जागरूकता अभियान और निगरानी कार्य किए जा रहे हैं।

संरक्षण के लिए आगे की रणनीति
वन विभाग ने संकेत दिया है कि—
- गिद्धों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
- दवाओं एवं रसायनों के दुष्प्रभाव से बचाव के लिए पशुपालकों में जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
- नियमित अंतराल पर मॉनिटरिंग और सर्वेक्षण जारी रहेगा।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में गिद्धों की बढ़ती उपस्थिति प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के सकारात्मक परिणामों को दर्शाती है। यह सर्वेक्षण भविष्य की संरक्षण रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा।