पितृपक्ष भारतीय संस्कृति और परंपरा का ऐसा पखवाड़ा है, जिसमें श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करते हैं। इस बार पितृपक्ष का आरंभ और अंत दोनों ही खगोलीय दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाले साबित होने जा रहे हैं। कारण यह है कि 07 सितंबर 2025 को पितृपक्ष की शुरुआत पूर्णिमा पर पूर्ण चंद्रग्रहण के साथ होगी, जबकि 21 सितंबर 2025 को पितृमोक्ष अमावस्या के दिन आंशिक सूर्यग्रहण पड़ेगा। भारत में चंद्रग्रहण का दृश्य देखा जा सकेगा, जबकि सूर्यग्रहण यहां दिखाई नहीं देगा।

इसी विशेष खगोलीय संयोग को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है कि 122 साल बाद पितृपक्ष की शुरुआत और अंत ग्रहण की घटनाओं से हो रहे हैं। लेकिन राष्ट्रीय विज्ञान प्रसारक पुरस्कार से सम्मानित सारिका घारू ने स्पष्ट किया कि इस तरह की जानकारी आधी-अधूरी है और ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है।
1903 की घटना का सच
सारिका ने बताया कि 1903 का उदाहरण अक्सर पेश किया जा रहा है कि उस समय भी पितृपक्ष की शुरुआत और अंत पर ग्रहण लगे थे। लेकिन यह पूर्ण सत्य नहीं है। दरअसल, 21 सितंबर 1903 को पितृमोक्ष अमावस्या के दिन तो पूर्ण सूर्यग्रहण जरूर हुआ था, किंतु इसके 15 दिन बाद 06 अक्टूबर 1903 को आंशिक चंद्रग्रहण पड़ा, जो शरद पूर्णिमा पर था। उस समय तक पितृपक्ष समाप्त हुए 15 दिन बीत चुके थे।
अर्थात 1903 में पितृपक्ष के आरंभ और समापन पर ग्रहण नहीं थे, बल्कि एक ग्रहण पितृपक्ष में और दूसरा उसके काफी बाद पड़ा था। इस प्रकार सोशल मीडिया पर चल रही “122 साल बाद दोग्रहण” वाली बात पूरी तरह भ्रामक है।

1978 और 2006 में भी बने थे ऐसे संयोग
सारिका ने बताया कि पितृपक्ष में दो ग्रहण होना कोई दुर्लभ घटना नहीं है। इससे पहले भी यह संयोग कई बार घटित हो चुका है।
- 1978 में पितृपक्ष का आरंभ 16 सितंबर को पूर्ण चंद्रग्रहण से हुआ और इसका समापन 02 अक्टूबर को आंशिक सूर्यग्रहण के साथ हुआ। दोनों घटनाओं का भारत में प्रत्यक्ष प्रभाव दर्ज हुआ।
- 2006 में पितृपक्ष का आरंभ 07 सितंबर को आंशिक चंद्रग्रहण से हुआ और पितृमोक्ष अमावस्या 22 सितंबर को वलयाकार सूर्यग्रहण के साथ हुई। चंद्रग्रहण भारत में दिखा जबकि सूर्यग्रहण दिखाई नहीं दिया।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि पितृपक्ष के दौरान दो ग्रहण होना खगोल विज्ञान की स्वाभाविक घटना है, कोई विरल या अलौकिक संयोग नहीं।

2025 का खगोलीय महत्व
इस वर्ष का पितृपक्ष वैश्विक स्तर पर खास है क्योंकि इसकी शुरुआत और समापन दोनों पर खगोलीय घटनाएं हो रही हैं।
- 07 सितंबर 2025 : भाद्रपद पूर्णिमा पर पूर्ण चंद्रग्रहण। भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई हिस्सों से दिखाई देगा।
- 21 सितंबर 2025 : पितृमोक्ष अमावस्या पर आंशिक सूर्यग्रहण। यह भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन अमेरिका और अफ्रीका के कुछ भागों में इसका अवलोकन संभव होगा।
यह स्थिति ज्योतिषीय और खगोलीय दोनों ही दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर जोर
सारिका घारू ने कहा कि धार्मिक आस्था और परंपरा का सम्मान करना हमारी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों को नजरअंदाज करना गलत है। “ग्रहण खगोलीय घटनाएं हैं, जो खगोल विज्ञान की गणनाओं से दशकों पहले तक ज्ञात कर ली जाती हैं। इन्हें किसी शुभ-अशुभ घटना से जोड़ना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है।”
उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों को लेकर चेताया कि “बिना पड़ताल किए ऐसे संदेशों को साझा करना वैज्ञानिक तथ्यों पर ग्रहण लगाने के समान है।”
पितृपक्ष का सामाजिक और धार्मिक महत्व
पितृपक्ष में श्राद्ध, तर्पण और दान के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों को स्मरण करते हैं। इसे भारतीय समाज में कृतज्ञता और पूर्वज सम्मान का पर्व कहा जाता है। खगोल विज्ञान की दृष्टि से यह संयोग एक सामान्य घटना है, लेकिन धार्मिक परंपरा के साथ वैज्ञानिक जानकारी को जोड़ना ही आज की जरूरत है।
सारिका का कहना है कि हमें अपने पूर्वजों की स्मृति को श्रद्धा और वैज्ञानिक चेतना के साथ मनाना चाहिए। यह समाज में अंधविश्वास दूर करने और वैज्ञानिक सोच विकसित करने का अवसर है।
ग्रहण और पितृपक्ष से जुड़े तथ्य (सारिका के अनुसार)
| वर्ष | तिथि | अवसर | ग्रहण का प्रकार | भारत में दृश्यता |
|---|---|---|---|---|
| 21 सितम्बर 1903 | पितृमोक्ष अमावस्या | सूर्यग्रहण | भारत में नहीं | |
| 06 अक्टूबर 1903 | शरद पूर्णिमा (पितृपक्ष समाप्ति के 15 दिन बाद) | चंद्रग्रहण (आंशिक) | भारत में दिखा | |
| 16 सितम्बर 1978 | पितृपक्ष आरंभ | पूर्ण चंद्रग्रहण | भारत में दिखा | |
| 02 अक्टूबर 1978 | पितृमोक्ष अमावस्या | आंशिक सूर्यग्रहण | भारत में नहीं | |
| 07 सितम्बर 2006 | पितृपक्ष आरंभ | आंशिक चंद्रग्रहण | भारत में दिखा | |
| 22 सितम्बर 2006 | पितृमोक्ष अमावस्या | वलयाकार सूर्यग्रहण | भारत में नहीं | |
| 07 सितम्बर 2025 | पितृपक्ष आरंभ | पूर्ण चंद्रग्रहण | भारत में दिखेगा | |
| 21 सितम्बर 2025 | पितृमोक्ष अमावस्या | आंशिक सूर्यग्रहण | भारत में नहीं |
122 साल बाद पितृपक्ष में “दोग्रहण” होने की चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर यह कोई अद्वितीय घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार पितृपक्ष के आरंभ और समापन पर ग्रहण हो चुके हैं।
सारिका घारू का स्पष्ट संदेश है कि “धर्म और आस्था को विज्ञान के साथ जोड़ें, अंधविश्वास से बचें और तथ्यों को जाने बिना उन्हें साझा न करें।”