शराबी ड्राइवर ने बस दुर्गा पंडाल में घुसाई, हादसे में 13 लोग घायल हो गए। इनमें से 5 की हालत गंभीर है !

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जबलपुर (सिहोरा), मंगलवार रात।
मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के सिहोरा कस्बे में दुर्गोत्सव की भक्ति और उल्लास मंगलवार की रात अचानक दहशत में बदल गया। रात करीब 10 बजे एक तेज़ रफ्तार बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने दुर्गा पंडाल में जा घुसी। चारों ओर चीख-पुकार, भगदड़ और खून से सनी ज़मीन – यह दृश्य हर किसी के लिए दिल दहला देने वाला था।


हादसे की भयावह तस्वीर

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पंडाल में आरती चल रही थी। महिलाएं और बच्चे सड़क किनारे खड़े होकर देवी दर्शन कर रहे थे। अचानक पीछे से आती एमपी49 पी 0261 नंबर की बस ने पहले दो बाइक, एक कार और राहगीरों को टक्कर मारी और फिर सीधे पंडाल में घुस गई।
लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। भगदड़ मच गई और जो जहां था, वहीं से जान बचाकर भागा।


घायलों की स्थिति

हादसे में 13 लोग घायल हुए।

  • सभी को पहले सिहोरा स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
  • इनमें से 5 लोग गंभीर थे, जिन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
  • देर रात करीब 2 बजे तीन घायलों को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया।
  • बाकी 8 घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।

डॉक्टरों का कहना है कि घायलों को सिर, पैर और हाथ में गंभीर चोटें आई हैं, कुछ मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है।


नशे में धुत ड्राइवर, नियमों की अनदेखी

पुलिस जांच में सामने आया कि बस चालक प्रदीप मिश्रा शराब के नशे में था।

  • वह कटनी से जबलपुर जा रही बस लेकर सिहोरा में घुसा।
  • जबकि उस मार्ग पर नो एंट्री का नियम लागू था।
  • डिवाइडर से बस को जबरन निकालते हुए उसने रफ्तार और बढ़ा दी।
  • पैसेंजरों ने आपत्ति जताई तो चालक ने और तेज़ गाड़ी भगाई।

यह लापरवाही दर्जनों ज़िंदगियों पर भारी पड़ गई।


प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

हादसे की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया।

  • विधायक संतोष बरकड़े तुरंत मौके पर पहुंचे।
  • कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और एसपी संपत उपाध्याय भी घटनास्थल व अस्पताल पहुंचे।
  • संभागायुक्त धनंजय सिंह और आईजी प्रमोद वर्मा ने मेडिकल कॉलेज में घायलों से मुलाकात की।
  • डॉक्टरों को निर्देश दिए गए कि इलाज में किसी भी तरह की कमी न रहे।

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि

  • घायलों को रेडक्रॉस से 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
  • साथ ही बस स्टैंड से बाहर कहीं भी वाहन खड़ा करने पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
  • एसडीएम गोरखपुर अनुराग सिंह को मेडिकल कॉलेज में रहकर उपचार की निगरानी करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रत्यक्षदर्शियों का दर्द

हादसे के समय मौजूद दो महिलाओं ने बताया –
“हम सड़क किनारे खड़े होकर आरती देख रहे थे, तभी पीछे से बस इतनी तेज़ आई कि कुछ समझ ही नहीं पाए। लोगों के साथ हमारे बच्चों को भी चोट लगी। उस पल हर कोई बस जान बचाने की कोशिश कर रहा था।”


सवालों के घेरे में सुरक्षा

यह घटना प्रशासन और यातायात व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है –

  • नो एंट्री जोन में भारी वाहन कैसे घुसा?
  • ड्राइवर की मेडिकल और अल्कोहल जांच कितनी नियमित होती है?
  • क्या दुर्गा पंडाल जैसे भीड़-भरे क्षेत्रों में पर्याप्त बैरियर और सुरक्षा इंतज़ाम थे?

इन सवालों के बीच पीड़ित परिवार और घायलों की पीड़ा शब्दों से परे है।

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