शासकीय स्कूलों के प्रति अभिभावकों और बच्चों का बढ़ा आकर्षण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव !

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मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। शासकीय स्कूलों के प्रति अभिभावकों और विद्यार्थियों का बढ़ता विश्वास अब आंकड़ों में भी झलकने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम-2026 के शुभारंभ अवसर पर बताया कि सरकारी विद्यालयों में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार का प्रमाण है।

राजधानी भोपाल स्थित मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टी.टी. नगर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर अभियान की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने नवप्रवेशित बच्चों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और उन्हें नि:शुल्क साइकिल एवं पाठ्य पुस्तकें वितरित कीं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने साइकिल की घंटियां बजाकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया, जिससे माहौल उत्साह और उमंग से भर गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्ष 2025-26 में शासकीय विद्यालयों में नामांकन में 32.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो जनता के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। इस वर्ष सरकार ने 1 करोड़ 45 लाख विद्यार्थियों के नामांकन का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को ड्रॉप आउट की संख्या लगभग शून्य करने के लिए बधाई भी दी।

उन्होंने बताया कि कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जा सका है। “स्कूल चले हम” अभियान 1 से 4 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश में 369 सांदीपनि विद्यालयों की स्थापना की गई है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही पीएमश्री स्कूल भी आधुनिक शिक्षा प्रणाली को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अटल टिंकरिंग लैब, रोबोटिक लैब, आईसीटी लैब और व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े स्टॉल का अवलोकन किया। “स्कूल चले हम” अभियान पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें शिक्षा के महत्व को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।

मुख्यमंत्री ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वे पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर और उद्यमी बनें और देश के विकास में योगदान दें। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क साइकिल, गणवेश, पुस्तकें और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आगामी महीनों में 4 लाख से अधिक विद्यार्थियों को साइकिल वितरित की जाएगी।

शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत स्थानीय भाषाओं में पाठ्य सामग्री तैयार की जा रही है। जनजातीय क्षेत्रों में विद्यार्थियों को विशेष रूप से इन पुस्तकों का वितरण किया जा रहा है। इसके अलावा अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों की भी व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 94 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नि:शुल्क लैपटॉप प्रदान किए गए हैं। वहीं स्कूल टॉपर विद्यार्थियों को स्कूटी देने की योजना भी संचालित की जा रही है। बजट में इन योजनाओं के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया है।

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रवेशोत्सव का दिन शिक्षा विभाग के लिए उत्सव जैसा है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 1 करोड़ विद्यार्थियों का नामांकन किया जा चुका है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विकासखंड स्तर पर बुक फेयर आयोजित करने की भी जानकारी दी, जहां निजी स्कूलों के विद्यार्थी भी सस्ती पाठ्य पुस्तकों का लाभ उठा सकेंगे।

कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, राज्य मंत्री कृष्णा गौर सहित कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहे।

इस प्रकार “स्कूल चले हम” अभियान के माध्यम से प्रदेश में शिक्षा को नई दिशा मिल रही है। शासकीय स्कूलों में बढ़ता नामांकन इस बात का संकेत है कि अब अभिभावकों का भरोसा सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर मजबूत हो रहा है और राज्य सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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