शाहगढ़ विद्युत मंडल के 32 वर्षीय आउटसोर्स कर्मचारी संदीप रजक की ट्रांसफॉर्मर पर मरम्मत कार्य करते समय करंट लगने से मौत हो गई। बता दे की घटना उस समय हुई जब संदीप और उसके साथी लाइनमैन भरत यादव रामपुर गाँव में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए गए थे।
बताया जा रहा है की भरत यादव ने आधिकारिक परमिट लेकर रामपुर फीडर की बिजली सप्लाई बंद कर दी। इसके बाद संदीप ने ट्रांसफॉर्मर पर मरम्मत शुरू की। और कुछ ही मिनटों बाद अप्रत्याशित रूप से बिजली सप्लाई वापस चालू हो गई, जिससे संदीप करंट के झटके की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई।

वही संदीप के करंट लगते ही भरत यादव ने उसे बचाने की बजाय वहां से भागने का प्रयास किया। विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता दीपक वर्मा घटनास्थल पर नहीं पहुंचे और उनका मोबाइल बंद मिला, जिससे उनकी भूमिका पर संदेह पैदा होता है।
तो वही मृतक के परिजनों के अनुसार, संदीप और भरत यादव के बीच पिछले महीने एक विवाद हुआ था, जिसमें भरत यादव ने संदीप को गालियाँ देकर जान से मारने की धमकी दी थी। हालांकि बाद में मामला सुलझा लिया गया था। वही परिजनों ने कई बार दीपक वर्मा से संदीप और भरत यादव को अलग-अलग ड्यूटी पर लगाने की मांग की, लेकिन वर्मा ने संदीप को नौकरी से निकालने की धमकी देकर मामले को दबाने की कोशिश की।

तो वही मृतक के परिजनों ने शव को नेशनल हाइवे पर रखकर चक्का जाम कर दिया और भरत यादव व दीपक वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। और दो घंटे के प्रदर्शन के बाद पुलिस, तहसीलदार ग्यानचंद राय और विद्युत विभाग के डीई मयंक मरकाम के आश्वासन पर जाम हटाया गया। वही विद्युत विभाग ने आंतरिक जाँच का दावा किया है, लेकिन परिजनों को संदेह है कि मामला दबाने की कोशिश हो सकती है।

तो वही यह घटना न सिर्फ विद्युत विभाग की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि कर्मचारियों के बीच पनप रहे विवादों और प्रशासनिक उपेक्षा को भी दिखाती है। मृतक के परिजनों को न्याय मिलना चाहिए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, सरकार को आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा नीतियों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। व्यूरो रिपोर्ट, रिपब्लिक सागर मीडिया .