शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देते हुए संभाग कमिश्नर अनिल सुचारी ने विद्यालयों में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि शासकीय स्कूलों में केवल पाठ्य ज्ञान ही नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही प्रत्येक माह पालकों की बैठक आयोजित करने और सभी विद्यालयों व छात्रावासों में वरिष्ठ अधिकारियों के नाम के साथ आपातकालीन नंबर अंकित करने के निर्देश दिए।
कमिश्नर श्री सुचारी सागर जिले के बंडा विकासखंड अंतर्गत बरा माध्यमिक शाला में “भविष्य से भेंट” कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बच्चों, शिक्षकों और अधिकारियों से सीधे संवाद कर शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति को समझा।
विद्यालय निरीक्षण और व्यवस्थाओं का जायजा
कमिश्नर ने नवीन शैक्षणिक सत्र के तहत “प्रवेश उत्सव” के अवसर पर स्कूल का निरीक्षण किया। उन्होंने स्कूल परिसर की साफ-सफाई, कक्षाओं की स्थिति, पेयजल व्यवस्था, फर्नीचर, पंखे और वेंटिलेशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का बारीकी से अवलोकन किया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र पूरे किए जाएं और विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं अनिवार्य हैं।

बच्चों से संवाद, साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के दौरान कमिश्नर श्री सुचारी ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उन्हें पढ़ाई के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी उतने ही अवसर मिलने चाहिए जितने निजी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिलते हैं। प्रशासन इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।
मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता जांच
कमिश्नर ने विद्यालय में चल रही मध्यान्ह भोजन योजना का भी निरीक्षण किया। उन्होंने मेन्यू के अनुसार तैयार किए गए कड़ी-चावल की गुणवत्ता, स्वाद और स्वच्छता की जांच की। इतना ही नहीं, उन्होंने स्वयं बच्चों के साथ बैठकर भोजन भी किया, जिससे भोजन की गुणवत्ता का वास्तविक आकलन किया जा सके।

ऐतिहासिक रिकॉर्ड देखकर की सराहना
निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने विद्यालय के पुराने दस्तावेजों का भी अवलोकन किया। उन्होंने वर्ष 1876 से संचालित विजिटर बुक को देखा, जो चार भाषाओं में आज भी सुरक्षित है। इस ऐतिहासिक धरोहर को देखकर उन्होंने स्कूल प्रबंधन की सराहना की।
इसके अलावा उन्होंने उपस्थिति पंजी, लेखा रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी गहन जांच की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
पाठ्य सामग्री और खेल सामग्री का वितरण
कार्यक्रम के अंत में कमिश्नर श्री सुचारी ने विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें और खेल सामग्री वितरित की। इससे बच्चों में उत्साह का माहौल देखा गया और उन्होंने खुशी के साथ सामग्री प्राप्त की।
‘भविष्य से भेंट’ कार्यक्रम से मिला प्रेरणा का मंच
“स्कूल चलें हम” अभियान के अंतर्गत आयोजित “भविष्य से भेंट” कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रेरित करना है। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के सफल और प्रेरणादायक व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है, जो बच्चों से अपने अनुभव साझा करते हैं।
इसी क्रम में बंडा के इस विद्यालय में भी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों ने बच्चों को शिक्षा के महत्व और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

शिक्षा सुधार की दिशा में मजबूत पहल
कमिश्नर के इन निर्देशों से स्पष्ट है कि प्रशासन शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए गंभीर है। मासिक पालक बैठक, आपातकालीन नंबर की अनिवार्यता और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान जैसे कदम शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाएंगे।
इस पहल से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।