शिवपुरी जिला अस्पताल से नवजात चोरी, 300 पुलिसकर्मी उतरे मैदान में; महिला सागर में गिरफ्तार, बच्चा सुरक्षित बरामद !

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शिवपुरी जिला अस्पताल से मंगलवार सुबह एक दिन का नवजात बच्चे को चुरा ले गई महिला को सागर पुलिस ने बुधवार देर रात पकड़ लिया। पुलिस ने न केवल महिला को हिरासत में लिया, बल्कि बच्चे को सुरक्षित बरामद कर तुरंत अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस ऑपरेशन में करीब 300 पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला। जगह जगह नाकाबंदी और बसों की तलाशी के बीच यह मिशन किसी बड़े मैनहंट जैसा दिखा।

कहानी की शुरुआत: अस्पताल से गायब हुआ नवजात

शिवपुरी अस्पताल में प्रसूता रोशनी आदिवासी ने एक दिन पहले ही बच्ची को जन्म दिया था। वार्ड में मौजूद एक अज्ञात महिला परिवार से मेलजोल बढ़ा रही थी। मंगलवार सुबह करीब 5 बजे वह बच्ची को यह कहते हुए उठाकर ले गई कि पति से दिखाकर आती हूँ।

लेकिन समय बीतता गया, महिला लौटी ही नहीं। परिजनों ने तलाश की, कुछ नहीं मिला। अस्पताल की गलियों से बाहर सड़क तक खोज हुई, फिर पुलिस को सूचना दी गई। वहीं से इस मामले ने मोड़ लिया।

कैमरों से सुराग, तकनीक से पीछा

शिवपुरी पुलिस ने तुरंत इलाके में नाकाबंदी कर दी। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। इसी दौरान लोकेशन सागर के आसपास ट्रेस हुई। जानकारी मिलते ही सागर पुलिस सक्रिय हो गई। जिले में अलर्ट, प्रमुख रास्तों पर चेकिंग, और लगातार इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग।

सोशल मीडिया पर आए फुटेज ने काम आसान किया। आखिरकार सूचना मिली कि महिला झांसी तरफ से आने वाली बस में है। पुलिस टीमें बस का इंतजार करती रहीं और कैंट थाना क्षेत्र के पगारा के पास बस रोकी गई।

बस में बच्चा लिए बैठी मिली महिला

बस रुकते ही पुलिस ने तलाशी ली। एक महिला सीट पर शांति से बैठी थी, गोद में नवजात। सवाल पूछे गए तो पहले वह टालती रही। फिर बोली कि बच्चा शिवपुरी से लाया है। गिरफ्तार होने पर भी उसकी कहानी बदलती रही, जैसे सच को दबाने की कोशिश हो रही हो।

तुरंत मेडिकल जांच, बच्चा ICU में भर्ती

पुलिस टीम नवजात को लेकर सागर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंची। डॉक्टरों ने जांच की और बच्चे को एसएनसीयू में भर्ती कर लिया। एडिशनल एसपी लोकेश सिंहा और ग्रामीण एएसपी संजीव उईके खुद अस्पताल पहुंचे और स्वास्थ्य की जानकारी ली।

बच्चा फिलहाल सुरक्षित है और उपचार जारी है।

महिला की पहचान और शुरुआती बयान

महिला खुद को शिवपुरी के हीरापुर की बताती है। वह दावा करती है कि उसे पता नहीं वह बस में कैसे बैठी। यह बयान जांच को हीलाहवाली की ओर संकेत करता है। पुलिस अभी उसे पूछताछ के लिए रखे हुए है। उसकी भूमिका, उद्देश्य और किसी गैंग या मानसिक स्थिति को लेकर जांच जारी है।

पुलिस की फुर्ती ने बचाई जिंदगी

यह सिर्फ एक बच्चा नहीं था, किसी माँ का दिल था। पुलिस की सक्रियता और सामूहिक प्रतिक्रिया ने साबित किया कि संवेदनशील मामलों में हर सेकंड मायने रखता है। 300 से ज्यादा जवानों की नाकेबंदी, सड़कें, चौराहे, बसें और जांच। यह सिर्फ कानून का मामला नहीं था, मानवीय दायित्व की जीत भी थी।

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
7806077338, 9109619237

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