नई दिल्ली, 9 दिसंबर 2024: सरकार ने वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी संजय मल्होत्रा को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का नया गवर्नर नियुक्त किया है। वे RBI के 26वें गवर्नर होंगे और 11 दिसंबर से अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। संजय मल्होत्रा का यह नियुक्ति निर्णय तब लिया गया है जब मौजूदा गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल 10 दिसंबर 2024 को समाप्त हो रहा है।

शक्तिकांत दास का कार्यकाल और उनका योगदान
शक्तिकांत दास 12 दिसंबर 2018 को रिजर्व बैंक के गवर्नर बने थे और उनके कार्यकाल को बाद में तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया था। उन्होंने उर्जित पटेल की जगह ली थी। शक्तिकांत दास के कार्यकाल में RBI ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनमें प्रमुख रूप से ब्याज दरों को महंगाई के दबाव के कारण स्थिर रखना शामिल था। दास के नेतृत्व में RBI ने आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए कई कदम उठाए, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चुनौती महंगाई पर नियंत्रण और अर्थव्यवस्था को स्थिर करना रही। उनकी अगुवाई में RBI ने लगभग दो वर्षों तक ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा और महंगाई के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए दरों में कटौती से बचने की कोशिश की।
उनके कार्यकाल के दौरान आर्थिक विकास दर में गिरावट भी देखी गई, खासकर जुलाई-सितंबर की तिमाही में, जब भारत की विकास दर घटकर 5.4% तक पहुंच गई, जो सात तिमाहियों में सबसे निचला स्तर था। इस समय, RBI पर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव था, जिससे संजय मल्होत्रा को मुश्किल समय में गवर्नर पद संभालने का अवसर मिलेगा।

संजय मल्होत्रा का करियर और योग्यताएँ
राजस्थान कैडर के 1990 बैच के IAS अधिकारी संजय मल्होत्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अनुभवी अधिकारी हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है और उन्होंने पब्लिक पॉलिसी में मास्टर डिग्री प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, USA से की है। मल्होत्रा की विशेषज्ञता वित्तीय सेवा, टैक्सेशन, पावर, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और माइन्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों में रही है।
फाइनेंस मंत्रालय में सचिव (रेवेन्यू) के रूप में कार्य करने से पहले, उन्होंने वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग में सचिव के रूप में भी कार्य किया। संजय मल्होत्रा के पास राज्य और केंद्र सरकार दोनों स्तरों पर फाइनेंस और टैक्सेशन में गहरी विशेषज्ञता है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंदीदा अधिकारियों में माने जाते हैं, जिन्हें सुधारवादी और काम करने वाले अधिकारियों के रूप में जाना जाता है।
मल्होत्रा की एक खास विशेषता यह है कि वे किसी भी मुद्दे पर काम करने से पहले उस पर गहन शोध करते हैं। उन्हें अपनी बैठकें और प्रेजेंटेशन बहुत अच्छे से तैयार करना आता है, जिससे उनका प्रभावी कामकाजी तरीका हर मीटिंग में दिखाई देता है। उनके कामकाजी अंदाज और शोध के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें एक सक्षम और प्रभावी अधिकारी बना दिया है।
आरबीआई गवर्नर के रूप में संजय मल्होत्रा का दृष्टिकोण
संजय मल्होत्रा को RBI का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है, और उनका कार्यभार ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब भारतीय रिजर्व बैंक को कई चुनौतीपूर्ण आर्थिक स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। RBI पर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है, और मल्होत्रा को इस मुद्दे पर सही दिशा में निर्णय लेना होगा। संजय मल्होत्रा को वित्तीय सेवा क्षेत्र में उनके गहरे ज्ञान और सरकार की नीति को समझने के कारण एक सक्षम गवर्नर माना जा रहा है, जो RBI को मजबूत नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं।

भारत के अर्थव्यवस्था के संदर्भ में संजय मल्होत्रा की भूमिका
भारत की मौजूदा आर्थिक स्थिति में मंदी के संकेत हैं और इसके साथ ही महंगाई दर भी उच्च स्तर पर बनी हुई है। RBI को महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। संजय मल्होत्रा के पास राज्य और केंद्रीय स्तर पर टैक्सेशन और वित्तीय सुधारों का व्यापक अनुभव है, जो उन्हें इस कठिन समय में RBI की नीतियों को आकार देने में मदद करेगा। उनके पास भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और बढ़ावा देने के लिए आवश्यक अनुभव और दृष्टिकोण है।
भविष्य की चुनौतियाँ और दृष्टिकोण
नए गवर्नर के रूप में संजय मल्होत्रा को सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे भारतीय रिजर्व बैंक को ऐसे समय में नेतृत्व दें, जब सरकार और RBI के बीच सहयोग और तालमेल की आवश्यकता है। आर्थिक मंदी के दौर में, केंद्रीय बैंक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, खासकर ब्याज दरों में संशोधन, महंगाई को नियंत्रित करना और बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता बनाए रखना।
संजय मल्होत्रा की नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके पास 33 से अधिक वर्षों का प्रशासनिक अनुभव है और वित्तीय सेवाओं, टैक्सेशन और नीति निर्धारण में गहरी विशेषज्ञता है। ऐसे समय में जब भारतीय रिजर्व बैंक को कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, मल्होत्रा की नियुक्ति देश की आर्थिक स्थिरता और विकास को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।