सागर, 01 फरवरी 2026।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
रिपोर्टर – अर्पित सेन
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संत शिरोमणि गुरु रविदास की जयंती के पावन अवसर पर सुरखी विधानसभा क्षेत्र के राहतगढ़ में भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने संत रविदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विधिवत पूजन किया और उनके जीवन एवं शिक्षाओं पर प्रकाश डाला।
मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि संत रविदास भारतीय संत परंपरा के महान समाज सुधारक थे। उन्होंने अपने समय में समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे जातिवाद, ऊँच-नीच और छुआछूत का खुलकर विरोध किया। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा धर्म दिखावे में नहीं बल्कि मानव सेवा और भक्ति में होता है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि मन की पवित्रता ही सबसे बड़ा धर्म है और जन्म के आधार पर किसी को बड़ा या छोटा नहीं माना जा सकता। संत रविदास ने समाज के दबे-कुचले वर्गों को आत्मसम्मान और चेतना दी और उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया।

संत रविदास ने धर्म को कर्म, करुणा और समानता से जोड़ा। उन्होंने भक्ति और कर्मयोग को एक साथ अपनाने पर बल दिया। मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि संत रविदास ने अपने जीवन में ईमानदार श्रम को पूजा का सर्वोच्च माध्यम माना और सिखाया कि मेहनत और परिश्रम ही व्यक्ति की सच्ची सेवा और भक्ति का प्रतीक हैं। उनका प्रसिद्ध संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” आज भी हमें जीवन और धर्म का सार समझाता है। यह संदेश बताता है कि मानव मन की शुद्धता और नेक विचार ही व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं।
मंत्री श्री राजपूत ने संत रविदास के योगदान को केवल उनके समय तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि उनके विचार और शिक्षाएँ आज के समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें समाज में समानता, करुणा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा, भक्ति और मानव सेवा के माध्यम से समाज को सशक्त और न्यायपूर्ण बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने संत रविदास द्वारा स्थापित भक्ति और कर्म के मार्ग पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि संत ने ईश्वर की प्राप्ति के लिए मंदिर, तीर्थ या दिखावे की आवश्यकता नहीं बताई, बल्कि सच्चे हृदय और सेवा की महत्ता को समझाया। उन्होंने भक्ति को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म और नैतिकता में उतारने का महत्व स्पष्ट किया। मंत्री ने उपस्थित नागरिकों से अपील की कि वे संत रविदास के मार्गदर्शन को अपने जीवन में अपनाएँ और समाज में प्रेम, समानता और मानवता का संदेश फैलाएँ।
इस अवसर पर मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि संत रविदास ने जीवन भर मेहनत और ईमानदार श्रम को पूजा का सर्वोच्च माध्यम माना। उन्होंने अपने अनुयायियों को सिखाया कि कर्मयोग से ही व्यक्ति अपने जीवन में सफलता और संतोष प्राप्त कर सकता है। मंत्री ने यह भी कहा कि संत रविदास के विचार आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। समाज में व्याप्त भेदभाव, असमानता और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना संत रविदास की शिक्षाओं का मूल संदेश है।
कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से लोग उपस्थित थे। उपस्थित थे: पुरूषोत्तम अहिरवार, प्रीतम उस्ताद (अध्यक्ष), नगर मंडल उपाध्यक्ष रोहित अहिरवार, पूर्व सरपंच चुन्नीलाल अहिरवार, वृंदावन अहिरवार, माते महेष अहिरवार, कल्याण दाउ, रामसींग अहिरवार, पुष्पेन्द्र अहिरवार, राजेश अहिरवार, यषपाल अहिरवार और सैकड़ों अन्य श्रद्धालु। सभी ने संत रविदास के विचारों और उनके संदेशों का सम्मान करते हुए कार्यक्रम में भाग लिया।