सागर, 08 मई 2025
भारत सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 5 जून 2024 को जारी अधिसूचना के अनुसार, पन्ना टाइगर रिजर्व और गंगऊ अभ्यारण्य के आसपास के क्षेत्रों को इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) घोषित किया जाएगा। इस संबंध में आज संभागायुक्त डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग समिति की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें जोन के निर्माण और प्रबंधन की रूपरेखा तय की गई।

बैठक के प्रमुख निर्णय
- क्षेत्रीय विस्तार:
- पन्ना, छतरपुर और दमोह जिलों के 67 गांवों को इको-सेंसिटिव जोन में शामिल किया जाएगा।
- तहसीलवार मानचित्रों के आधार पर सीमांकन किया जाएगा।
- जोनल मास्टर प्लान:
- 2026 तक एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच संतुलन बनाया जाएगा।
- गतिविधियों का वर्गीकरण:
- पूर्ण प्रतिबंधित: खनन, नए उद्योगों की स्थापना, ध्वनि एवं वायु प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियाँ।
- नियंत्रित: होटल और रिसॉर्ट्स (केवल नेशनल पार्क के 1 किमी दायरे में अनुमति)।
- प्रोत्साहित: वर्षा जल संचयन, कौशल विकास, पौधरोपण और इको-फ्रेंडली पर्यटन।
- जनजागरूकता एवं अनुपालन:
- स्थानीय समुदायों को ESZ के नियमों के बारे में शिक्षित किया जाएगा।
- केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसे बुनियादी ढाँचे के कार्यों में पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रमुख उपस्थिति
बैठक में कलेक्टर सुरेश कुमार (सागर), कलेक्टर पार्थ जायसवाल (छतरपुर), पन्ना टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक अंजना सुचिता तिर्की, जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और केन-बेतवा लिंक अथॉरिटी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
संभागायुक्त के निर्देश
डॉ. रावत ने जोर देकर कहा कि:
- “इको-सेंसिटिव जोन का उद्देश्य वन्यजीवों के आवासों की रक्षा करते हुए स्थानीय लोगों के हितों को संतुलित करना है।”
- “सभी हितधारकों के साथ समन्वय बनाकर कार्य योजना को अंतिम रूप दिया जाए।”
भविष्य की रणनीति
- विशेषज्ञ समिति गठित: ESZ के प्रबंधन के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी।
- निगरानी तंत्र: समिति प्रतिवर्ष जोन की प्रगति की समीक्षा करेगी।
- स्थानीय भागीदारी: ग्रामीणों को इको-टूरिज्म और संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।

यह पहल पन्ना टाइगर रिजर्व के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच सामंजस्य बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को प्राकृतिक विरासत का लाभ मिल सके।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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