नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र का छठवां दिन राजनीतिक तनाव और गहमागहमी से भरा रहा। मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले, विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने अडाणी विवाद और उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, और कई अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए। हालांकि, समाजवादी पार्टी (सपा) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता प्रदर्शन में नहीं पहुंचे।
संभल हिंसा: अखिलेश यादव और सपा के गंभीर आरोप
लोकसभा में उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा पर चर्चा के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना को “सोची-समझी साजिश” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसा के पीछे राजनीतिक मंशा थी और इसे चुनावी लाभ के लिए अंजाम दिया गया।
अखिलेश ने कहा:
“संभल में भाईचारे को गोली मारने का काम किया गया। भाजपा और उसके सहयोगी दल पूरे देश में साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इससे देश का भाईचारा और सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा है।”
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने भी घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“संभल में जो हुआ, उसके बाद भी किसी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। बदायूं, जौनपुर और अजमेर शरीफ जैसे स्थानों पर भी इसी तरह की घटनाएं हो रही हैं। यह पूरे देश में आग लगाने की साजिश का हिस्सा है।”
सरकार पर विपक्ष के आरोप
विपक्षी दलों ने संभल हिंसा के साथ-साथ अडाणी समूह पर लगे आरोपों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने सवाल उठाए कि क्यों सरकार अडाणी समूह से जुड़े विवादों पर जवाब देने से बच रही है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा:
“सरकार जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रही है। चाहे अडाणी समूह के वित्तीय विवाद हों या संभल जैसी घटनाएं, सरकार जवाबदेही से भाग रही है।”
संभल हिंसा: घटना पर अब तक क्या पता चला?
संभल हिंसा में स्थानीय प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। यह घटना तब हुई जब क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ा और एक सांप्रदायिक झड़प में हिंसा भड़क उठी। विपक्ष का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने समय पर कदम नहीं उठाए, जिससे स्थिति बिगड़ी।
भाजपा का पलटवार
विपक्ष के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष बेवजह मुद्दों को तूल दे रहा है। भाजपा सांसदों का कहना है कि सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
भाजपा के एक नेता ने कहा:
“संभल हिंसा की जांच हो रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विपक्ष सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को बढ़ावा दे रहा है।”
अडाणी विवाद: विपक्ष के सवालों का जवाब अधूरा
सत्र के दौरान अडाणी समूह से जुड़े वित्तीय विवाद पर भी चर्चा हुई। विपक्ष ने सरकार से पूछा कि क्यों इस मामले में कोई स्वतंत्र जांच समिति नहीं बनाई जा रही। सरकार ने विपक्ष के सवालों को नजरअंदाज करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और किसी निजी कंपनी पर चर्चा करने से आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन: सपा और TMC की गैरमौजूदगी
प्रदर्शन में सपा और TMC के शामिल न होने पर राजनीतिक हलकों में अटकलें लगाई जा रही हैं। इसे विपक्षी एकता पर सवाल उठाने वाला कदम माना जा रहा है। हालांकि, सपा और TMC ने अपनी गैरमौजूदगी पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहसें बढ़ सकती हैं। संभल हिंसा जैसे मुद्दों का चुनावी राजनीति पर असर पड़ सकता है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में, जहां जल्द ही स्थानीय चुनाव होने वाले हैं।
संभल हिंसा और अडाणी विवाद जैसे मुद्दे शीतकालीन सत्र में विपक्ष के लिए प्रमुख हथियार बने हुए हैं। जहां सरकार इन आरोपों को खारिज करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में संसद में इन मुद्दों पर और अधिक तीखी बहस होने की संभावना है।