टीकमगढ़ जिले के बम्हौरी में क्षत्रिय युवा समाज का विशाल युवा समागम एवं प्रतिभा सम्मान समारोह, शिक्षा और संस्कारों से राष्ट्र निर्माण पर जोर
बम्हौरी (टीकमगढ़), 14 सितम्बर 2025।
क्षत्रिय युवा समाज द्वारा आयोजित युवा समागम एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे युवा नेता अविराज भूपेन्द्र सिंह ने अपने ओजस्वी उद्बोधन से युवाओं को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि – “स्वयं की रक्षा करना आत्मरक्षा है, लेकिन सभी की रक्षा करना ही क्षत्रिय धर्म है। नशे से दूर रहना, शिक्षा को अपनाना और राष्ट्र की सेवा करना ही आज के युवाओं का सच्चा कर्तव्य है।”

नशे से दूर रहने और शिक्षा अपनाने का संदेश
अविराज भूपेन्द्र सिंह ने युवाओं से कहा कि अच्छी शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। युवा बेचारे नहीं, बल्कि विचारवान बनें। उन्होंने चेतावनी दी कि नशा व्यक्ति की शक्ति और समय दोनों को नष्ट कर देता है। यही नहीं, विदेशी ताकतें नशे से अर्जित धन का इस्तेमाल धर्मांतरण और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में करती हैं।
सोशल मीडिया और युवाओं की चुनौतियाँ
युवा नेता ने सोशल मीडिया पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज लगता है जैसे मोबाइल ही युवाओं का जीवन बन गया है। इससे मन की शुद्धता कम हो रही है। उन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य का उदाहरण देते हुए कहा – “मन ही सबसे बड़ा तीर्थ है, इसे शुद्ध कर लो तो जहां बैठोगे वही तीर्थ बन जाएगा।”
उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे मोबाइल से हटकर प्रत्यक्ष संवाद करें, समाज से जुड़ें और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ें।

युवा शक्ति और हिंदुत्व का दर्शन
समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि –
- युवा वही है जो सबको सम्मान दे, सबको अपनाए और एकजुटता का संदेश दे।
- हिंदुत्व का वास्तविक दर्शन ही सबको अपनाने और सबको साथ लेकर चलने में है।
- स्वामी विवेकानंद की परिभाषा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवा वह है जो अनीति के खिलाफ लड़े, दुर्गुणों से दूर रहे और काल की चाल बदलने का साहस रखे।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा, जोश, तपस्या, निडरता, आत्मसंयम, क्षमा और सत्य ही युवा को प्रतिभावान और सफल बनाते हैं।

महाराणा प्रताप का आदर्श जीवन
अविराज भूपेन्द्र सिंह ने क्षत्रिय परंपरा और शौर्य का स्मरण कराते हुए कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने केवल 14 वर्ष की आयु में युद्ध लड़कर यह सिद्ध कर दिया कि आयु नहीं, बल्कि संकल्प और प्रयास तय करते हैं कि हम कितनी ऊंचाई तक जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि जब कई राजा भोग-विलास में डूबे थे, तब महाराणा प्रताप ने मातृभूमि के लिए संघर्ष चुना। उन्होंने भीलों को सम्मान दिया, उन्हें साथ लिया और नई सेना बनाकर बादशाह अकबर जैसे शक्तिशाली शासक को चुनौती दी। यह उदाहरण आज के क्षत्रिय युवाओं के लिए साहस, एकजुटता और राष्ट्रप्रेम का प्रेरक संदेश है।

राष्ट्रनिर्माण में युवाओं की भूमिका
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा शांति, उदारता और आत्मचिंतन का मार्ग दिखाया है। आज का युवा यदि राष्ट्र को आत्मनिर्भर और प्रगतिशील बनाना चाहता है तो उसे स्वदेशी को बढ़ावा देना होगा।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि भारत एक अमर राष्ट्र है, जिसका निर्माण संस्कृति, सेवा और समर्पण की भावना से हुआ है। यही मार्ग युवाओं को राष्ट्र की प्रगति की ओर ले जाएगा।

युवा समागम में सम्मान और रैली
युवा समागम की शुरुआत निवाड़ी तिगैला से विशाल वाहन रैली के साथ हुई। रैली मड़िया, विरौराखेत, ज्यौरामौरा और रानीगंज तिराहा होते हुए बम्हौरी पहुँची। मार्गभर में समाज के युवाओं ने रैली का भव्य स्वागत किया।
बम्हौरी पहुँचकर रैली विशाल युवा समागम में परिवर्तित हुई। यहां अविराज भूपेन्द्र सिंह का ऐतिहासिक और भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने मंच से शिक्षा, खेल, संस्कृति, समाजसेवा और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं एवं समाजसेवियों को सम्मानित किया।
समाज की शक्ति का प्रदर्शन
समाज की युवा शक्ति का जागरण, एकता का प्रदर्शन और प्रतिभाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।
कार्यक्रम में भगवत सिंह दांगी, हीरालाल दांगी, लखन दांगी, प्रकाश सिंह दांगी, महेन्द्र सिंह, रामकुमार दांगी, लल्लू सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, गंधर्व सिंह, संजय सिंह, राम अवतार सिंह, मैथिलीशरण सिंह, ज्ञान सिंह, अजेन्द्र सिंह, रविंद्र सिंह, मुकेश सिंह, सट्टन सिंह, अजीत सिंह, वीर सिंह, केहर सिंह, अमित सिंह, राहुल सिंह, जितेंद्र सिंह, के.पी. दांगी, भरत सिंह दांगी, काशीराम सिंह, देवी सिंह, पूरन सिंह, मनोज प्रताप सिंह, नरेन्द्र सिंह सहित बुंदेलखंड के सभी जिलों से दांगी समाज के युवा और वरिष्ठजन मौजूद रहे।

निष्कर्ष
बम्हौरी का यह युवा समागम न केवल एक सामाजिक आयोजन था, बल्कि यह युवाओं की शक्ति, एकता और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में संकल्प का सशक्त संदेश भी था। अविराज भूपेन्द्र सिंह का यह आह्वान कि –
“सभी की रक्षा करना ही क्षत्रिय धर्म है”
युवाओं के मन में संस्कार, साहस और समाजसेवा की नई चेतना भर गया।