सागर। खेती को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ते हुए जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपनी फार्मर आईडी बनवाएं। कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने स्पष्ट किया कि फार्मर आईडी अब किसान की अनिवार्य डिजिटल पहचान बनती जा रही है और भविष्य में अधिकांश सरकारी योजनाओं का लाभ इसी के आधार पर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिले में कुल 12 लाख 22 हजार 610 किसान हितग्राही पंजीकृत हैं, जिनमें से अब तक 4 लाख 417 किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। शेष किसानों से शीघ्र पंजीयन कराने की अपील की गई है, ताकि उन्हें योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके।

क्या है फार्मर आईडी?
फार्मर आईडी एक आधार से जुड़ी डिजिटल पहचान है, जिसमें किसान की व्यक्तिगत जानकारी, भूमि अभिलेख, बोई गई फसल और खेती से संबंधित गतिविधियों का विवरण दर्ज होता है।
यह एक प्रकार से किसानों के लिए विशेष पहचान पत्र है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंचे।

योजनाओं का लाभ लेने में होगी अनिवार्य
कलेक्टर ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए केवल ई-केवाईसी पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि फार्मर आईडी भी अनिवार्य होगी।
इसके अतिरिक्त फसल बीमा, फसल उपार्जन, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), बीज एवं उर्वरक सब्सिडी जैसी योजनाओं में भी फार्मर आईडी की आवश्यकता होगी।

फार्मर आईडी के प्रमुख लाभ
- बार-बार कागजी दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता समाप्त
- योजनाओं की राशि सीधे बैंक खाते में
- बैंक ऋण और बीमा क्लेम की प्रक्रिया में तेजी
- सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता
- फर्जी लाभार्थियों पर रोक
कलेक्टर ने कहा कि फार्मर आईडी केवल एक कार्ड नहीं, बल्कि किसानों की डिजिटल पहचान है, जो भविष्य में कृषि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाएगी।

जनसुनवाई में 168 आवेदनों पर हुई कार्यवाही
जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में आज 168 आवेदनों पर सुनवाई की गई।
कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने स्वयं उपस्थित रहकर आमजन की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। इस दौरान संयुक्त कलेक्टर श्रीमती आरती यादव, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती राजनंदनी शर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट श्री अमन मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के माध्यम से नागरिकों को अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के समक्ष रखने का अवसर मिलता है। आज प्राप्त आवेदनों में राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, कृषि, पेयजल, विद्युत, पेंशन और भूमि संबंधी मामलों की प्रमुखता रही।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त प्रकरणों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
जिला प्रशासन ने पुनः किसानों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि वे शासकीय योजनाओं का लाभ लेने हेतु आवश्यक दस्तावेज पूर्ण रखें तथा समस्याओं के समाधान के लिए जनसुनवाई जैसे मंचों का उपयोग करें।