बीना (सागर जिला), 03 सितंबर 2025: ग्राम बारधा में सरपंच की कथित प्रताड़ना और मारपीट के बाद एक व्यक्ति द्वारा आत्महत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि सरपंच रामनरेश राजपूत और उसके साथियों ने पैसे के लेन-देन को लेकर उन्हें इतना परेशान किया कि उनके पति को आत्महत्या करनी पड़ी। मंगलवार को पीड़िता मीरा साहू अपने बेटों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंची और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। परिवार ने पुलिस पर भी आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया है।

मीरा साहू, जो बीना थाना अंतर्गत ग्राम बारधा की निवासी हैं, ने अपने बेटे सुमित साहू और अन्य बेटों के साथ मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे कलेक्टर कार्यालय का रुख किया। रोते-बिलखते परिवार ने अधिकारियों से न्याय दिलाने की अपील की। मीरा ने बताया कि उनके पति श्री राम साहू ने गांव के सरपंच रामनरेश राजपूत को 50,000 रुपये उधार दिए थे। जब उन्होंने यह रकम वापस मांगी, तो सरपंच और उसके साथियों ने 30 जुलाई को उनके पति और बेटे के साथ मारपीट की। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध है, जिसे परिवार ने सबूत के तौर पर पेश किया है।

मीरा साहू ने आगे बताया, “हमने तुरंत बीना थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अगले ही दिन, 31 जुलाई को मेरे पति ने घर पर आत्महत्या कर ली। मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ, जिसमें सरपंच और उसके साथियों द्वारा की गई प्रताड़ना का पूरा विवरण लिखा है। नोट में साफ लिखा है कि सरपंच के दबाव और मारपीट से तंग आकर उन्होंने यह कदम उठाया।” परिवार का आरोप है कि सुसाइड नोट मिलने के बावजूद पुलिस ने सरपंच रामनरेश राजपूत और उसके साथियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की और न ही कोई जांच शुरू की।

मामले को और जटिल बनाते हुए, मीरा साहू ने कहा कि सरपंच अब राजीनामा कराने के लिए दबाव बना रहा है। उन्होंने बताया, “सरपंच ने हमारे परिवार को धमकाने के लिए झूठे मामले दर्ज कराए हैं। मेरे बड़े पापा के लड़के जगदीश साहू और हमारे पड़ोसी नारायण कुशवाहा पर मारपीट का फर्जी प्रकरण थमाया गया है, ताकि हम चुप हो जाएं और मामले को रफा-दफा कर दें।” परिवार का कहना है कि यह सब सरपंच की साजिश है, जिसका मकसद खुद को बचाना और पीड़ित पक्ष को दबाना है।

कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मीरा साहू और उनके बेटों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा, “हमारे पति और पिता की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। पुलिस की लापरवाही की वजह से न्याय मिलना मुश्किल हो रहा है। हम चाहते हैं कि सीसीटीवी फुटेज, सुसाइड नोट और अन्य सबूतों की जांच हो और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।” परिवार ने यह भी अपील की कि झूठे मामलों को रद्द किया जाए और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए, क्योंकि सरपंच के दबाव से उन्हें खतरा महसूस हो रहा है।

इस मामले पर बीना थाने के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला। सरपंच रामनरेश राजपूत से भी प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हुए। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सरपंच की दबंगई के कई किस्से हैं, और यह घटना गांव की राजनीति से जुड़ी हो सकती है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर कार्यालय ने परिवार की शिकायत दर्ज कर ली है और मामले की जांच के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए जा सकते हैं। यह घटना ग्रामीण इलाकों में सत्ता के दुरुपयोग और पुलिस की निष्क्रियता के मुद्दे को फिर से उजागर करती है। परिवार अब उच्च अधिकारियों या अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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