सांदिपनी विद्यालय की एनसीसी गर्ल्स कैडेट्स ने किया वृक्षारोपण !

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पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील विषय को लेकर सागर स्थित सांदिपनी विद्यालय (शासकीय मल्टीलैंगुअल बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-01) की एनसीसी जूनियर गर्ल्स कैडेट्स ने एक प्रेरणादायक पहल की है। 7 एम.पी. गर्ल्स बटालियन से जुड़ी इन कैडेट्स ने विद्यालय परिसर में सामूहिक रूप से वृक्षारोपण कर पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। इस अवसर ने न केवल विद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया, बल्कि छात्राओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी उत्पन्न की।

कार्यक्रम का उद्देश्य और संदेश

वृक्षारोपण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि छात्रों में “हरित सोच” विकसित करना और उन्हें पर्यावरणीय संकटों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम की अगुवाई कर रहीं शाला की एनसीसी प्रभारी एवं प्रथम अधिकारी स्मिता मिश्रा ने कैडेट्स को वृक्षारोपण के महत्व से अवगत कराते हुए कहा—

वृक्षों का महत्व केवल ऑक्सीजन तक सीमित नहीं है, ये हमारे जीवन, जलवायु, जैव विविधता और भावी पीढ़ियों की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है। वृक्षारोपण प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और सम्मान का प्रतीक है।”

उन्होंने यह भी बताया कि एनसीसी केवल शारीरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में नेतृत्व, जागरूकता और सेवा की भावना विकसित करने वाला राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसमें भागीदारी कर छात्राएं एक सशक्त नागरिक के रूप में देश निर्माण में योगदान देती हैं।

विद्यालय स्टाफ की प्रेरक उपस्थिति

इस अवसर पर शाला उप प्राचार्य डॉ. वंदना खरे ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि—

आज के युग में जब हम प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, ऐसे में वृक्षारोपण एक सामूहिक उत्तरदायित्व है। छात्राएं इस संदेश को समाज तक पहुंचाने की प्रेरक वाहक बनें।”

कार्यक्रम में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. मनोज श्रीवास्तव (प्र.अ.), प्रदीप कुमार पांडेय (प्र.अ.), मंजूलता जैन (व्याख्याता), निर्मला उदैनिया (उ.श्रे.शि.), और शिक्षिका आरती गौतम की उपस्थिति ने छात्राओं को विशेष उत्साह प्रदान किया। शिक्षकों ने छात्राओं के इस कार्य की सराहना करते हुए इसे “शिक्षा से आगे बढ़कर समाज सेवा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम” बताया।

कैडेट्स ने खुद चुने पौधे, खुद की जिम्मेदारी

कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि प्रत्येक कैडेट ने अपने नाम से एक पौधा लगाया, और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी भी स्वयं ली। यह पहल न केवल पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि छात्राओं में उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित करेगी।

नीम, पीपल, गुलमोहर, आम, अमरूद, आंवला जैसे स्थानीय और औषधीय गुणों से भरपूर पौधों का चयन कर उन्हें विद्यालय परिसर के उपयुक्त स्थानों पर रोपा गया। छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे नियमित रूप से इन पौधों की देखभाल करेंगी और आगे भी वृक्षारोपण जैसे अभियान चलाती रहेंगी।

पर्यावरणीय शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना का संगम

इस आयोजन ने यह दर्शाया कि एनसीसी जैसे संगठन न केवल राष्ट्र रक्षा की भावना को सशक्त करते हैं, बल्कि देश और समाज के प्रति संवेदनशील जिम्मेदार नागरिक तैयार करते हैं। छात्राओं में जो पर्यावरणीय चेतना उत्पन्न हुई, वह आने वाले समय में समाज के हर हिस्से तक पहुंचेगी और एक सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखेगी।

डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा—

एक पौधा लगाना एक जीवन को संजोने जैसा है। आज की यह पहल न केवल विद्यालय परिसर को हरित बनाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुंदर पर्यावरण की सौगात देगी।

सांदिपनी विद्यालय की अभिनव पहल

सांदिपनी विद्यालय का यह वृक्षारोपण कार्यक्रम शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की समझ का बेहतरीन उदाहरण है। एनसीसी कैडेट्स के इस प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया कि छात्राएं यदि संकल्प लें, तो वे पर्यावरण की रक्षा से लेकर राष्ट्र सेवा तक हर मोर्चे पर अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।

विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. वंदना खरे ने अंत में सभी छात्राओं, शिक्षकों और उपस्थितजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि—

शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह समाज में सकारात्मक बदलाव लाए। आज की इस पहल ने हमें यह विश्वास दिलाया है कि हमारी बेटियां न केवल शिक्षा में श्रेष्ठ हैं, बल्कि समाज सेवा और पर्यावरण रक्षण में भी पीछे नहीं हैं।

सांदिपनी विद्यालय की एनसीसी गर्ल्स कैडेट्स द्वारा किया गया वृक्षारोपण कार्यक्रम एक प्रेरणा देने वाली पहल है, जो न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए आवश्यक है, बल्कि युवा पीढ़ी को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का भी माध्यम है। ऐसे आयोजनों से न केवल स्कूल परिसर हरियाली से भरता है, बल्कि छात्राओं के मन में सेवा, कर्तव्य और प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना भी गहराती है।

यह पहल निश्चित ही आने वाले समय में और संस्थानों को भी प्रेरित करेगी कि वे शिक्षा को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए, छात्रों को संपूर्ण नागरिक बनाने की दिशा में कार्य करें।

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