सागर। शहर के कटरा बाजार स्थित जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मुतीऊर्रहमान का भोपाल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे 66 वर्ष के थे। उनके इंतकाल की खबर जैसे ही सागर पहुंची, पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। धर्मगुरु, समाजसेवी और आम नागरिक बड़ी संख्या में शोक व्यक्त करने पहुंचे।

40 वर्षों तक निभाई इमामत की जिम्मेदारी
मौलाना मुतीऊर्रहमान पिछले करीब चार दशकों से जामा मस्जिद में इमामत की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वे न सिर्फ पांच वक्त की नमाज नियमित रूप से पढ़ाते थे, बल्कि रमजान के पाक महीने में पूरे एहतेमाम के साथ तरावीह की नमाज भी अदा कराते थे। धार्मिक मामलों में उनकी सादगी, संयम और विद्वता के चलते वे समाज में बेहद सम्मानित माने जाते थे।

बीमारी के बाद फिर बिगड़ी हालत
परिजनों के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें भोपाल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद हालत में सुधार होने पर वे सागर लौट आए थे।
मंगलवार सुबह एक बार फिर उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल भाग्योदय अस्पताल, सागर ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए भोपाल रेफर किया गया। भोपाल में इलाज के दौरान मंगलवार शाम उनका इंतकाल हो गया।
पूरे सम्मान के साथ हुई अंतिम विदाई
बुधवार को मौलाना मुतीऊर्रहमान का जनाजा उनके निज निवास मछरयाई से निकाला गया। दोपहर 2 बजे नमाजे जुहर के बाद जामा मस्जिद, कटरा बाजार में नमाजे जनाजा अदा की गई। इसके बाद उन्हें मोतीनगर स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

जनाजे में उमड़ी हजारों की भीड़
नमाजे जनाजा में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हुए। कटरा बाजार में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे, जिससे इलाके में जाम की स्थिति बन गई। जनाजे के दौरान हर आंख नम थी और लोग उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई देते नजर आए।
समाज के लिए अपूरणीय क्षति
मौलाना मुतीऊर्रहमान को एक सादगीपूर्ण जीवन, धार्मिक एकता और समाज को जोड़ने वाले व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाएगा। उनके निधन को मुस्लिम समाज ही नहीं, बल्कि पूरे सागर शहर के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।