सागर: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) की फिजियोथेरेपी विभाग की डॉ. श्रुति शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय मैनुअल थेरेपी कॉन्फ्रेंस-2026 में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें उनके शोध के लिए दिया गया, जो प्रसव के बाद महिलाओं में होने वाले कमर दर्द को दवाओं के बिना कम करने के तरीकों पर आधारित है।
चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी। यह कार्यक्रम सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में हुआ, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों के फिजियोथेरेपिस्ट और शोधकर्ता शामिल हुए।

शोध: प्रसव के बाद महिलाओं में कमर दर्द
डॉ. श्रुति शर्मा ने अपने शोध में 144 महिलाओं को शामिल किया और एक वर्ष की कड़ी रिसर्च के बाद निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने पाया कि नियमित और वैज्ञानिक तरीके से की गई फिजियोथेरेपी तकनीकें और कसरत प्रसव के बाद होने वाले कमर दर्द (पोस्टपार्टम लो बैक पेन) को काफी हद तक कम कर सकती हैं, बिना किसी पेन किलर या अन्य दवाओं के।
डॉ. श्रुति ने बताया, “पेन किलर दवाओं के लंबे समय तक उपयोग से शरीर पर कई दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। मेरा शोध उन महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा जो दवाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहती हैं। फिजियोथेरेपी प्राकृतिक, सुरक्षित और दीर्घकालिक समाधान प्रदान करती है।”
डॉ. श्रुति का शैक्षिक और व्यक्तिगत परिचय
डॉ. श्रुति शर्मा मूल रूप से बुरहानपुर जिले की रहने वाली हैं। वे वर्ष 2022 से बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर में पदस्थ हैं। वे एक बच्चे की मां हैं और उनके पति पेशे से इंजीनियर हैं।
छात्रावस्था से ही डॉ. श्रुति मेधावी रही हैं। उन्होंने 12वीं कक्षा में जीव विज्ञान विषय में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए थे। वे पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं।
डॉ. श्रुति बताती हैं कि उनके भीतर शुरू से ही कुछ अलग करने का जुनून था। “जब मेरे अधिकतर साथी एमबीबीएस करने की योजना बना रहे थे, तब मैंने फिजियोथेरेपी को अपना करियर चुना। एमबीबीएस डॉक्टर मरीज को जीवन देते हैं, जबकि फिजियोथेरेपिस्ट मरीज को बेहतर तरीके से जीना सिखाते हैं। फिजियोथेरेपी के माध्यम से बिना सर्जरी और बिना दर्द के मरीज को स्वास्थ्य लाभ दिया जा सकता है,” उन्होंने कहा।
देश और मेडिकल समुदाय में सम्मान
डॉ. श्रुति का शोध न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए बल्कि भारतीय फिजियोथेरेपी और महिला स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है। देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के फिजियोथेरेपिस्ट और शोधकर्ताओं ने उनके शोध की सराहना की और इसे महिला स्वास्थ्य सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।