सागर के आकाश चौरसिया ने देश-दुनिया में बजाया नवाचार का बिगुल !

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जहां आधुनिकता के नाम पर खेतों पर रसायनों की बारिश और मिट्टी की सेहत बिगाड़ने वाली परंपराएं बढ़ रही हैं, वहीं सागर जिले के युवा किसान आकाश चौरसिया ने प्रकृति की गोद में समाधान खोजकर भारतीय खेती को नई दिशा दी है। कलेक्टर श्री संदीप जी आर की मंशा के अनुरूप स्वस्थ जीवन और सतत कृषि के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए आकाश आज किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले आकाश ने जब समाज में बढ़ते रासायनिक प्रदूषण और बीमारियों की वास्तविकता देखी, तो उन्होंने अपनी राह बदल दी। उन्होंने ठान लिया कि वह खेत को ही अस्पताल बनाएंगे और बंजर होती मिट्टी को फिर से जीवन देंगे। इसी संकल्प ने उन्हें बना दिया “प्राकृतिक खेती के डॉक्टर”

आकाश वर्ष 2009 से खेती में प्रयोग कर रहे हैं और वर्ष 2014 में विकसित की गई उनकी मल्टीलेयर एग्रीकल्चर तकनीक ने कृषि जगत में क्रांति ला दी। इस तकनीक में एक ही खेत में 4-5 परतों में अलग-अलग फसलें उगाई जाती हैं। यह खेती न केवल मिट्टी और जल संरक्षण करती है बल्कि न्यूनतम लागत में अधिक उत्पादन का रास्ता खोलती है।

मल्टीलेयर मॉडल की विशेषताएं:
70-80% तक पानी की बचत
ज़मीन का तीन गुना बेहतर उपयोग
4 गुना तक अधिक उत्पादन
• मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण
• रसायन मुक्त, स्वास्थ्यवर्धक उत्पादन

परतवार खेती की फसली संरचना:

  1. मिट्टी के भीतर की फसलें जैसे हल्दी-अदरक
  2. पत्तेदार सब्जियां जैसे धनिया-पालक
  3. बेल वाली फसलें जैसे करेला-परवल
  4. फलदार फसलें जैसे पपीता-सहजन
  5. ऊपर बेल वाली सब्जियां जैसे लौकी-तुरई

खेती के साथ-साथ उन्होंने जल संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाया। उनके खेतों में 30 लाख लीटर तक जल पुनर्भरण तकनीक, स्वदेशी बीज बैंक, जैविक खाद निर्माण और संगीत चिकित्सा (Music Therapy Farming) जैसी अनूठी पहलें किसानों में उत्साह भर रही हैं।

आज आकाश न केवल सागर बल्कि पूरे देश के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। वे मुफ्त प्रशिक्षण देकर युवाओं, किसानों, महिलाओं और सैनिकों को प्राकृतिक खेती अपनाने और आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रहे हैं।

जैसे खेत में उठती कोमल कोंपलें नई सुबह का संकेत देती हैं, वैसे ही आकाश की सोच कृषि जगत में एक स्वर्णिम भविष्य का बीज बो रही है। प्रकृति संग सामंजस्य में खेती का यह मंत्र ना केवल किसान को समृद्धि देगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और सुरक्षित धरती सौंपने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

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