सागर, बंडा |
बंडा थाना क्षेत्र में पदस्थ दो पुलिसकर्मियों पर एक महिला के साथ दुर्व्यवहार करने और उसकी निजता भंग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस घटना को लेकर शुक्रवार को क्षेत्रीय क्षत्रिय लोधी समाज और सर्वसमाज के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर एसडीओपी कार्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक (एसपी) के नाम ज्ञापन सौंपा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

क्या है मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 4 जुलाई को बंडा थाना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 12 निवासी एक महिला के घर में बगैर किसी पूर्व सूचना, वारंट या स्पष्ट कारण के दो पुलिसकर्मी जबरन घुस आए। आरोप है कि जब वे घर में घुसे, उस समय महिला स्नान कर रही थी, जिससे उसकी निजता का हनन हुआ। इससे महिला अत्यंत मानसिक आघात में है। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि इस दौरान कोई महिला पुलिसकर्मी भी साथ नहीं थी, जो कि कानूनन अनिवार्य है, विशेषकर जब किसी महिला से संबंधित कार्रवाई की जा रही हो।
महिला का भतीजा, राज लोधी, जो कि मामले से जुड़ा बताया जा रहा है, महिला के साथ नहीं रहता है। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों द्वारा महिला के घर में घुसकर उसके रिश्तेदार की निजी गाड़ी जब्त करना भी सवालों के घेरे में है।
जनता और नेताओं की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी लगते ही बंडा क्षेत्र में जनाक्रोश फैल गया। पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी ने घटनास्थल पर पहुंचकर महिला से मुलाकात की और पुलिस कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह कृत्य न केवल कानून की अवहेलना है, बल्कि महिला की गरिमा और सामाजिक सुरक्षा के खिलाफ भी है।
तरवर सिंह लोधी ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन पांच दिन के भीतर पीड़ित महिला को न्याय नहीं दिलाता और दोषी पुलिसकर्मियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो सर्वसमाज मिलकर बंडा में आंदोलन छेड़ेगा।

प्रशासन की प्रतिक्रिया
एसडीओपी प्रदीप वाल्मीकि ने बताया कि उन्हें महिला से दुर्व्यवहार की शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अभी तक संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित नहीं किया गया है, जिससे लोगों में असंतोष बना हुआ है।
सवाल उठते हैं
- बिना वारंट के महिला के घर में पुलिस का प्रवेश क्या उचित था?
- महिला पुलिसकर्मी की अनुपस्थिति में घर में प्रवेश कर कार्रवाई क्यों की गई?
- क्या इस कार्रवाई का कोई लिखित आदेश या प्राथमिकी मौजूद थी?
- मानसिक आघात पहुंचाने वाले इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?
समाज की मांग
- दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए
- पीड़ित महिला को मानसिक और कानूनी सहायता दी जाए
- मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जाए
- भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं
बंडा की यह घटना केवल एक महिला के अधिकारों का उल्लंघन नहीं, बल्कि पूरे समाज की चेतना को झकझोर देने वाला प्रसंग है। पुलिस पर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, न कि भय का कारण बनने की। यदि शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो इस मामले में व्यापक जनआंदोलन की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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