सागर शहर के बहुचर्चित चौरसिया हत्याकांड मामले में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत सक्सेना की अदालत ने मुख्य आरोपी रंजन उर्फ बब्बू राय, निवासी पटना (बिहार) को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 2000 रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। वहीं, मामले में नामजद शहर के जाने-माने इंजीनियर राजेश मिश्रा सहित छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया है।
कार में मिले थे व्यापारी और बेटी के शव
अभियोजन के अनुसार, 17 जुलाई 2019 की रात करीब 2 बजे आरटीओ कार्यालय के पास एक सेंट्रो कार में गोली लगने से घायल एक पुरुष और एक महिला को देखे जाने की सूचना सिविल लाइन थाना पुलिस को मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि सड़क किनारे खड़ी कार की ड्राइवर सीट पर एक व्यक्ति गंभीर अवस्था में था, जबकि बगल की सीट पर एक युवती मृत अवस्था में मिली। कार की पिछली सीट पर एक महिला जीवित अवस्था में बैठी मिली।

जांच में सामने आया कि कार में सवार लोग थाना सिविल लाइन में पदस्थ राजेश चौरसिया के परिवार के सदस्य थे। सूचना पर राजेश चौरसिया को मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने घायल व्यक्ति की पहचान अपने छोटे भाई ब्रजेश चौरसिया, मृत युवती की पहचान भतीजी महिमा चौरसिया तथा पीछे बैठी महिला की पहचान भाभी राधा चौरसिया के रूप में की।
अस्पताल में दो की मौत घोषित
घायल ब्रजेश चौरसिया को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें और उनकी बेटी महिमा को मृत घोषित कर दिया। प्रारंभ में मामले में मर्ग कायम की गई। जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से सुसाइड नोट और कई डिजिटल साक्ष्य मिले, जिनसे सुपारी देकर हत्या कराने की साजिश का खुलासा हुआ।
सुपारी किलिंग का आरोप
मर्ग जांच के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने रंजन उर्फ बब्बू राय, आशु कुमार सिन्हा, मनोज यादव, सुरेंद्र कुमार साहू, इंजीनियर राजेश मिश्रा, श्याम सुंदर सोनी और अनिल शुक्ला के खिलाफ धारा 302, 306, 107 भादवि एवं आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया। विवेचना पूर्ण होने के बाद चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अदालत का फैसला
लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने मुख्य आरोपी रंजन उर्फ बब्बू राय को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, अन्य छह आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न पाए जाने पर उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। मामले की ओर से अपर लोक अभियोजक दीपक जैन ने प्रभावी पैरवी की।
इंजीनियर मिश्रा के वकील का पक्ष
सुनवाई के दौरान इंजीनियर राजेश मिश्रा के वकील ने दलील दी कि मृतक ब्रजेश चौरसिया उनके पड़ोसी और पारिवारिक मित्र थे। दोनों परिवारों के बीच घनिष्ठ संबंध थे, आपसी आना-जाना और खाना-पीना होता था। कभी किसी प्रकार का विवाद नहीं रहा। वकील ने यह भी बताया कि मृतक पूर्व में भी आवश्यकता पड़ने पर उनकी कार ले जाता था। घटना वाले दिन भी वह कार यह कहकर ले गया था कि परिवार के साथ कहीं जाना है। देर रात तक कार वापस नहीं आने पर उन्होंने मृतक के भाई राजेश चौरसिया और परिजनों से पूछताछ भी की थी। अगले दिन सुबह उन्हें ब्रजेश की मृत्यु की सूचना मिली।
शहर में रहा चर्चित मामला
सीमेंट व्यापारी ब्रजेश चौरसिया और उनकी बेटी की निर्मम हत्या का यह मामला लंबे समय तक शहर में चर्चा का विषय रहा। अदालत के फैसले के बाद जहां एक ओर मुख्य आरोपी को सजा मिलने से पीड़ित परिवार को आंशिक न्याय मिला है, वहीं अन्य आरोपियों के बरी होने पर मामले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।