सागर जिले के ग्रामीण अंचलों में इस समय रबी की फसलें अपने बेहतर दौर में हैं। किसानों ने गेहूं, चना, जौ, मटर, सरसों, अलसी, मसूर, आलू सहित अन्य फसलों की बुवाई की है और अधिकतर खेतों में फसलें अच्छी स्थिति में नजर आ रही हैं। लेकिन इसी बीच जंगली जानवरों की बढ़ती आवाजाही ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
जंगल से सटे गांवों में चिंकारा, हिरण और नीलगाय किसानों के लिए गंभीर समस्या बन गए हैं। ये जंगली जानवर झुंड बनाकर दिन हो या रात, बेखौफ होकर खेतों में घुस रहे हैं और हरी-भरी फसलों को चट कर जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई खेतों में फसल की शुरुआती बढ़वार ही पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
जिले के सागर, खुरई, बंडा, रहली, देवरी, केसली, मालथौन, राहतगढ़, शाहगढ़, जैसीनगर, बीना और गढ़ाकोटा ब्लॉकों के दर्जनों गांवों में हालात एक जैसे बने हुए हैं। खासकर जंगल से लगे इलाकों में किसानों की परेशानी अधिक बढ़ गई है। मालथौन क्षेत्र में चने की फसल पर हिरणों के दिनदहाड़े खेतों में घुसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे फसलें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

मजबूरी में किसान कड़ाके की ठंड के बावजूद रात-दिन खेतों की रखवाली करने को विवश हैं। कई किसान अलाव जलाकर, टॉर्च, ढोल-नगाड़े और पटाखों की मदद से जानवरों को भगाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इसका असर सीमित समय तक ही रहता है। जानवर कुछ देर बाद फिर खेतों में लौट आते हैं।
किसानों का कहना है कि फसलों पर आया यह संकट उनकी लागत और मेहनत दोनों को बर्बाद कर सकता है। उन्होंने वन विभाग और प्रशासन से जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम करने, मुआवजा देने और स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। यदि जल्द ही इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।