सागर: जनसुनवाई में 108 एंबुलेंस ड्राइवर ने की आत्मदहन की कोशिश, उच्च स्तरीय जांच का आदेश

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सागर, 09 सितम्बर 2025 – मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय सागर में जनसुनवाई आयोजित की जाती है, जिसमें जिले के नागरिक अपनी समस्याओं का समाधान अधिकारियों से सीधे कर सकते हैं। इसी क्रम में हाल ही में एक गंभीर घटना सामने आई, जब 108 एंबुलेंस का चालक अचानक जनसुनवाई में पहुंचा और अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने की कोशिश करने लगा।

घटना का त्वरित नियंत्रण
मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने तुरंत स्थिति को संभाला और चालक को सुरक्षित किया। अधिकारियों ने बताया कि चालक की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत नियंत्रण में लिया गया और किसी भी अप्रिय घटना को रोक दिया गया।

कलेक्टर के निर्देश पर उच्च स्तरीय जांच
इस गंभीर घटना को देखते हुए कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने अपर कलेक्टर श्री अविनाश रावत को निर्देशित किया है कि तीन दिवस के अंदर उच्च स्तरीय जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जांच समिति का गठन
अपर कलेक्टर श्री अविनाश रावत ने बताया कि जांच समिति का गठन कर दिया गया है। इस समिति में शामिल हैं:

  • मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी – डॉ. ममता तिमोरी
  • 108 एंबुलेंस की जोनल मैनेजर – अरुण चौधरी
  • जिला प्रभारी – रविंद्र खरे

जांच समिति का काम घटना के सभी पहलुओं की जांच कर पूर्ण रिपोर्ट तैयार करना और इसके आधार पर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करना है।

घटना की गंभीरता और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
यह घटना प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है कि समय पर कर्मचारियों की समस्याओं और उनके मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी आवश्यक है। कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का समाधान है, और इसमें कर्मचारियों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है।

आगे की प्रक्रिया
जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चालक के इस कदम के पीछे कौन-कौन से कारण हैं और किन अधिकारियों या विभागीय प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता है। इसके बाद आवश्यक प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष
सागर जिले में यह घटना प्रशासनिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से गंभीर है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जनसुनवाई जैसे मंचों पर न केवल नागरिकों बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा, उनकी समस्याओं की संवेदनशीलता और मानसिक स्थिति की भी पर्याप्त निगरानी आवश्यक है। प्रशासन ने इस मामले में त्वरित कदम उठाकर उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की दिशा में पहल की है।

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