सागर, 3 अक्टूबर: सागर जिले के जैसीनगर (जयसिंह नगर) का नाम बदलने को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा जैसीनगर का नाम जय शिवनगर करने की घोषणा के बाद दांगी क्षत्रिय समाज ने इसका विरोध करते हुए ज्ञापन सौंपा। इस बीच कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दशहरा कार्यक्रम में लोगों के बीच आकर इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा और स्थिति को स्पष्ट किया।

मंत्री का स्पष्ट संदेश:
कार्यक्रम में मंच से बोलते हुए मंत्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि “वह प्रस्ताव आए तो घोषणा कर देंगे।” मंत्री ने लोगों से सवाल किया कि फिलहाल प्रस्ताव भी भेजा नहीं गया है, बावजूद इसके समाज में असमंजस क्यों फैल रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे नगर का सम्मान हमारे राजाओं का सम्मान है, वैसे ही ऐतिहासिक पहचान का सम्मान भी बनाए रखना जरूरी है।
मंत्री ने कहा, “जब 500 करोड़ की योजनाएं घोषित की जा सकती हैं, तो जय सिंह की मूर्ति लगाने की घोषणा क्यों नहीं की जा सकती?” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका मकसद जीवंत ऐतिहासिक स्मृति को उजागर करना है।
उन्होंने मंच से यह भी कहा कि “हमारी जैसीनगर को नहीं बदला जाएगा” और किसी भी स्वार्थी व्यक्ति को जैसीनगर की पहचान को छेड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्री ने पूर्व मंत्री पर बिना नाम लिए तंज भी कसा और कहा कि जनता की भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि है।

दांगी क्षत्रिय समाज का विरोध:
दरअसल, 25 सितंबर को मुख्यमंत्री ने जनसभा में जैसीनगर का नाम जय शिवनगर करने की घोषणा की थी। इसके विरोध में दांगी क्षत्रिय समाज ने 29 सितंबर को कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन देकर आपत्ति जताई।
ज्ञापन में समाज ने कहा कि सागर और जयसिंह नगर सहित यह क्षेत्र दांगी क्षत्रिय शासकों के अधीन रहा है। इतिहास में उनकी राजधानी गढ़पहरा थी। जय सिंह देव ने वर्ष 1679 में जयसिंह नगर की स्थापना की थी, जिसे राजस्व अभिलेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों में जैसा नगर या जयसिंह नगर के नाम से दर्ज किया गया है।
समाज ने कहा कि नाम परिवर्तन की योजना उनके ऐतिहासिक और पारिवारिक विरासत के साथ खिलवाड़ है। ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, अशोकपुरा कांग्रेस नेता इंदर सिंह, दांगी समाज अध्यक्ष लखन सिंह सहित कई वरिष्ठ लोग मौजूद थे।

स्थिति का सार:
इस विवाद ने स्थानीय जनता और समाज के बीच भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। जबकि सरकार ने कोई अंतिम प्रस्ताव अभी तक नहीं भेजा है, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जनता को आश्वासन दिया है कि किसी भी निर्णय में स्थानीय भावनाओं और ऐतिहासिक पहचान का सम्मान सर्वोपरि रहेगा