सागर जिले के जैसीनगर विकासखंड अंतर्गत पडरही सेक्टर का मोचल आंगनवाड़ी केंद्र आज एक आदर्श बाल शिक्षा केंद्र के रूप में पहचाना जाता है, परंतु इसकी शुरुआत एक साधारण, कच्चे कमरे से हुई थी। इस परिवर्तन की कहानी है श्रीमती सी.बी. ठाकुर की अथक मेहनत, रचनात्मक सोच और बच्चों के प्रति समर्पण की, जिन्होंने बीते 16 वर्षों में इस केंद्र को शिक्षण नवाचारों का उदाहरण बना दिया है।

शुरुआत: सीमित संसाधनों में अपार संभावनाएं
जब श्रीमती ठाकुर ने केंद्र का कार्यभार संभाला, तब यह एक सामान्य कच्चे कमरे में संचालित होता था। सीमित संसाधनों और आधारभूत सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। गाँव के बच्चों को आंगनवाड़ी से जोड़ना उनकी पहली बड़ी चुनौती थी। उन्होंने बच्चों को आकर्षित करने के लिए अपने आसपास उपलब्ध स्थानीय सामग्री जैसे कि:
- रंग-बिरंगे बीज
- पत्ते
- सूखी गिलकी
- खाली डिब्बे
- कागज
का उपयोग करके खिलौने बनाए और शिक्षण-सहायक सामग्री तैयार की। केंद्र को उन्होंने खुद के हाथों से सजाया, जिससे बच्चों का रुझान बढ़ा और धीरे-धीरे उपस्थिति में भी सुधार होने लगा।

सामुदायिक सहयोग और नए भवन की स्थापना
श्रीमती ठाकुर के प्रयासों से प्रभावित होकर स्थानीय पंचायत ने केंद्र के लिए एक नया भवन स्वीकृत किया। भवन बनने के बाद भी उन्होंने अपने नवाचारों की गति को थमने नहीं दिया। उन्होंने शिक्षण को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए अनेक क्रियात्मक सुधार किए:
- बोरियों से खांचे सिलना
- दीवारों पर गत्ते के चित्र और कटआउट से सजावट
- खुली अलमारी में खिलौनों की व्यवस्था
- बुक कॉर्नर एवं प्ले कॉर्नर का निर्माण
इन नवाचारों ने न केवल बच्चों को आकर्षित किया, बल्कि शिक्षण प्रक्रिया को भी अधिक सजीव और सहभागी बना दिया।

ईसीई प्रशिक्षण और थीम आधारित शिक्षण की शुरुआत
श्रीमती ठाकुर ने प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECE) का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद थीम आधारित शिक्षण को अपनाया। इस पद्धति के अंतर्गत वे:
- दिनवार योजनानुसार गतिविधियाँ संचालित करती हैं
- बच्चों की सहभागिता और संवाद कौशल को बढ़ावा देती हैं
- अधिगम स्तर का सतत मूल्यांकन करती हैं
इस नई प्रणाली से बच्चों में न केवल जिज्ञासा बढ़ी है, बल्कि उनकी समझने, बोलने और सीखने की क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
समुदाय की भागीदारी और बाल चौपाल की पहल
बाल शिक्षा में सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने बाल चौपाल जैसे आयोजनों की शुरुआत की, जिसमें बच्चों के अभिभावक, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य ग्रामीणों को आमंत्रित किया जाता है। इससे न केवल समुदाय में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, बल्कि बच्चों की नियमित उपस्थिति और सीखने के प्रति रूचि में भी इजाफा हुआ है।

नवाचारों की पहचान और सम्मान
इन सतत प्रयासों और नवाचारों के परिणामस्वरूप जैसीनगर परियोजना द्वारा मोचल आंगनवाड़ी केंद्र को पहले “बाल शिक्षा केंद्र” के रूप में घोषित किया गया। यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि जब एक समर्पित कार्यकर्ता शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और संवेदनशीलता से कार्य करता है, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा परिवर्तन संभव है।
श्रीमती सी.बी. ठाकुर की यह यात्रा न केवल एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में समर्पण, नवाचार और सामुदायिक सहयोग से बाल शिक्षा की दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया जा सकता है। उनका प्रयास अन्य कार्यकर्ताओं के लिए भी एक प्रेरणा है और यह प्रमाण है कि शिक्षा की असली नींव जमीनी स्तर पर बनती है – जहाँ एक कच्चे कमरे से शुरू होकर, वह एक समृद्ध बाल शिक्षा केंद्र बन जाती है।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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