मालथौन (सागर), 7 जून 2025 — मालथौन विकासखंड के ललोई गांव ने 17 वर्षों से चली आ रही ‘परग’ कुप्रथा को समाप्त कर एक नई सामाजिक क्रांति की शुरुआत की है। इस कुप्रथा के तहत गांव में बेटियों के विवाह पर रोक लगाई गई थी, जबकि बेटों के विवाह पर कोई प्रतिबंध नहीं था। इससे गरीब और आदिवासी परिवारों को आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता था, क्योंकि उन्हें बेटियों की शादी के लिए अन्य स्थानों पर जाना पड़ता था।

ग्रामवासियों ने इस कुरीति को समाप्त करने का संकल्प लिया और सामूहिक रूप से एक गरीब आदिवासी परिवार की बेटी, मानसी गौड़, का विवाह धूमधाम से संपन्न कराया। इस विवाह समारोह में लगभग तीन लाख रुपये एकत्रित किए गए, जिसमें सभी ग्रामवासियों का योगदान था। समारोह में दमोह जिले के नरसिंहगढ़ से आई बारात का स्वागत पूरे हर्ष और उल्लास के साथ किया गया।

पूर्व गृहमंत्री और खुरई विधायक श्री भूपेंद्र सिंह ने इस ऐतिहासिक अवसर पर वर-वधु को आशीर्वाद दिया और ग्रामवासियों की सराहना की। उन्होंने कहा, “हम बेटियों को देवी स्वरूप मानते हैं, लेकिन ऐसी कुरीतियों को सहन नहीं करना चाहिए जो उनके सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि समाज को समय के साथ अपनी बुराइयों को छोड़ देना चाहिए, यह स्वस्थ और समृद्ध समाज के लिए आवश्यक है।

इस पहल ने न केवल ललोई गांव, बल्कि पूरे क्षेत्र में सामाजिक जागरूकता और समानता की मिसाल पेश की है। ग्रामवासियों का यह सामूहिक प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ललोई गांव की इस पहल को देखकर अन्य गांवों और क्षेत्रों में भी कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने की आवश्यकता महसूस हो रही है। यह घटना यह सिद्ध करती है कि सामूहिक प्रयास और सामाजिक जागरूकता से किसी भी कुरीति को समाप्त किया जा सकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता अर्पित सेन
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