महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को धरातल पर लाने की दिशा में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सागर इकाई ने एक प्रेरणादायक पहल की है। जिले में “आजीविका परामर्श एवं समाधान केन्द्र” की स्थापना कर उन महिलाओं को एक नया मंच दिया गया है, जो स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़कर अपने जीवन में परिवर्तन लाने के प्रयासों में जुटी हैं। यह केन्द्र महिलाओं को न केवल आजीविका संबंधी समस्याओं के समाधान का माध्यम प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सक्षम भी बनाएगा।

✔ उद्देश्य: मार्गदर्शन, समाधान और सशक्तिकरण
इस केन्द्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जिले की समूह से जुड़ी महिलाओं को विभिन्न विभागीय योजनाओं से जोड़ना, उनकी आजीविका संबंधी समस्याओं का समाधान करना, वित्तीय साक्षरता बढ़ाना, कौशल विकास तथा उद्यमिता में मार्गदर्शन प्रदान करना है। यह पहल महिलाओं को जागरूक, सक्षम और समृद्ध बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
अब महिलाएं सीधे आजीविका भवन पहुंचकर विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञ महिलाओं से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकती हैं। चाहे वो बैंकिंग संबंधी जटिलताएं हों, कृषि तकनीक की जानकारी चाहिए हो, घरेलू उत्पादों के विपणन की रणनीति बनानी हो या उद्यम आरंभ करने की योजना – यह केन्द्र हर स्तर पर सहयोगी बनकर खड़ा है।
✔ विशेषज्ञ सखियों की भूमिका: अनुभव से दिशा
इस केन्द्र की सबसे खास बात यह है कि इसमें स्वयं सहायता समूहों से ही तैयार हुई अनुभवी सीआरपी (Community Resource Person) कैडर – जैसे बैंक सखी, समता सखी, कृषि सखी, उद्यम सखी और जेंडर साक्षरता सखी – बारी-बारी से मौजूद रहती हैं। ये महिलाएं स्वयं विभिन्न योजनाओं, कार्यशालाओं और अनुभवों से सीखकर अब अन्य महिलाओं को दिशा दिखा रही हैं।
इन सखियों के अनुभव न केवल व्यवहारिक ज्ञान पर आधारित होते हैं, बल्कि वे महिलाओं की समस्याओं को गहराई से समझती हैं, क्योंकि वे स्वयं भी उन्हीं रास्तों से गुज़री होती हैं। यही उन्हें इस केन्द्र की रीढ़ बनाता है।
✔ केंद्र से जुड़ते ही बढ़ रही आत्मनिर्भरता
आजीविका परामर्श एवं समाधान केन्द्र, विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ महिलाओं को उन योजनाओं से जोड़ने में भी सहायक बन रहा है। इसके माध्यम से महिलाएं न केवल योजनाओं से लाभान्वित हो रही हैं, बल्कि अपने व्यवसाय, उत्पादन और विपणन क्षमताओं को बढ़ाकर वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर भी बन रही हैं।
केंद्र में आने वाली महिलाएं बैंक ऋण से लेकर विपणन सहायता, कृषि तकनीकी सलाह, खाद्य प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना, सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ाव जैसी अनेक प्रकार की जानकारियां प्राप्त कर रहीं हैं।
✔ प्रशासन का समर्थन और प्रोत्साहन
सागर जिले के कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने इस सराहनीय पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा –
“सूचना और मार्गदर्शन किसी भी व्यक्ति की प्रगति की पहली सीढ़ी होती है, विशेष रूप से जब हम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बात करते हैं। आजीविका परामर्श एवं समाधान केन्द्र एक ऐसा मंच है जो ग्रामीण महिलाओं को सही दिशा, संसाधन और प्रेरणा प्रदान कर उन्हें सपनों को पूरा करने का अवसर देगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में जिले के सभी विकासखंडों में इस प्रकार के केन्द्रों की स्थापना को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि अधिक से अधिक महिलाओं तक इसका लाभ पहुंचाया जा सके।
✔ महिलाएं कहती हैं – अब हम खुद निर्णय लेने में सक्षम हैं
केंद्र से जुड़ी मीनाक्षी पटेल, जो एक ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण लेकर अब उद्यमी बन चुकी हैं, कहती हैं –
“पहले तो समझ ही नहीं आता था कि क्या करें, कहां जाएं, किससे बात करें। इस केन्द्र ने मुझे आत्मविश्वास दिया कि मैं भी कुछ कर सकती हूं। अब मैं अपनी बेटियों को भी सिखा रही हूं कि खुद का भविष्य खुद बनाना होता है।”
शारदा अहिरवार, जो पहले सिर्फ समूह की सदस्य थीं और अब बैंक सखी बन चुकी हैं, कहती हैं –
“अब मैं गांव की दूसरी महिलाओं को भी बैंक और सरकार की योजनाओं से जोड़ती हूं। हमारी पहचान बनी है। यही असली सशक्तिकरण है।”
“आजीविका परामर्श एवं समाधान केन्द्र” केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि एक मंच है जो महिलाओं को जानकारी, समर्थन, प्रेरणा और समाधान एक ही स्थान पर प्रदान करता है। यह न केवल उन्हें आज की समस्याओं से लड़ने की ताकत देता है, बल्कि आने वाले कल को बेहतर बनाने की समझ भी देता है।
मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सागर इकाई की यह पहल वास्तव में एक नवाचार है – जो ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनकर उभर रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बनेगा।
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