सागर में “आदि कर्मयोगी अभियान” का प्रशिक्षण संपन्न

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चयनित आदिवासी ग्रामों के सर्वांगीण विकास के लिए अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी

सागर, 14 सितम्बर 2025।
जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित “आदि कर्मयोगी अभियान” के अंतर्गत जनपद पंचायत सागर के सभागार में 13 और 14 सितम्बर को दो दिवसीय ब्लॉक प्रोसेस लैब प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को चयनित आदिवासी ग्रामों के सर्वांगीण विकास कार्य हेतु प्रशिक्षित किया गया।


प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनरों की भूमिका

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मास्टर ट्रेनरों द्वारा किया गया। इनमें श्रीमती बबीता सोनी, प्रभारी श्रीमती भारती लारिया, श्री आलोक झरिया, श्री दिलीप मेहरा, श्री हृदय मोहन यादव और श्री मनीष रजक शामिल रहे। इन विशेषज्ञों ने अभियान के उद्देश्य, कार्ययोजना और विभिन्न विभागों की भूमिका पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।


दो आदिवासी ग्राम हुए चयनित

कार्यक्रम के दौरान सागर विकासखंड के दो आदिवासी ग्रामों को इस अभियान के लिए चुना गया —

  • रेंवझा
  • वेलई माफी

इन ग्रामों में समग्र और सतत विकास कार्यों का क्रियान्वयन किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि इन गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, वन एवं पर्यावरण, महिला एवं बाल कल्याण, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का समन्वित विकास सुनिश्चित हो।


विभागवार सहभागिता

प्रशिक्षण में अलग-अलग विभागों के अधिकारी और कर्मचारी सम्मिलित हुए। इनमें प्रमुख रूप से —

  • श्री उदल सिंह (पंचायत विभाग)
  • राघवेन्द्र सिंह राजपूत (शिक्षा विभाग)
  • श्रीमती नेहा वर्मा (पीएचई विभाग)
  • श्री चंदन सिंह (विद्युत विभाग)
  • श्रीमती तुलसा तंतवाय एवं सत्येंद्र जैन (वन विभाग)
  • नेहा जैन (महिला एवं बाल विकास विभाग)
  • श्री संजीव राजोरिया (पंचायत विभाग)
    सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

इन सभी प्रतिभागियों को अपने-अपने विभागीय कार्यों और योजनाओं का चयनित ग्रामों में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है।


अभियान का उद्देश्य

“आदि कर्मयोगी अभियान” का मुख्य लक्ष्य है —

  • आदिवासी ग्रामों में सरकारी योजनाओं की पहुँच और प्रभाव बढ़ाना
  • विभिन्न विभागों की गतिविधियों को एकीकृत रूप से लागू करना
  • ग्रामवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वच्छता और आधारभूत सुविधाओं से जोड़कर उनके जीवन स्तर में सुधार करना।
  • स्थानीय स्तर पर सशक्त और आत्मनिर्भर समुदाय का निर्माण करना।

आगे की रूपरेखा

प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद, अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि वे चयनित ग्रामों में जाकर अपनी-अपनी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में कार्य करें।

  • 17 सितम्बर से 25 सितम्बर के बीच नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएँगी।
  • इन बैठकों में प्रगति की समीक्षा होगी और आगामी कार्ययोजना तय की जाएगी।

निष्कर्ष

सागर में संपन्न हुआ यह प्रशिक्षण न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आदिवासी ग्रामों के लिए नए विकास अध्याय की शुरुआत भी है। अधिकारियों की प्रशिक्षित टीम अब इस जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ेगी कि चयनित ग्राम मॉडल गाँवों के रूप में उभरें और वहाँ के निवासियों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।

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