सागर में आदि कर्मयोगी अभियान का शुभारंभ: आदिवासी ग्रामों के विकास के लिए व्यापक रणनीति

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सागर जिले में 7 सितंबर 2025 को आदि कर्मयोगी अभियान के तहत डिस्ट्रिक्ट प्रोसेस लैब कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य आदिवासी समुदाय के आखिरी पंक्ति के व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाना, आदिवासी ग्रामों की विकास योजनाओं को समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना और प्रत्येक आदिवासी ग्राम को अधिकारियों द्वारा गोद लेकर मूलभूत विकास की दिशा में कार्य करना है। कार्यक्रम में वन अधिकारी श्री शैलेश माचला, सहायक आयुक्त श्री सुधीर श्रीवास्तव, श्री राजेश, श्री अशफाक खान सहित अन्य विभागीय अधिकारी और मास्टर ट्रेनर मौजूद थे।

आदिवासी समुदाय को सशक्त बनाने की पहल

कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने डिस्ट्रिक्ट प्रोसेस लैब के शुभारंभ के दौरान कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान के तहत मास्टर ट्रेनर आदिवासी ग्रामों में जाकर शासकीय योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने जोर दिया कि ग्रामों में रात्रि विश्राम कर आदिवासी समुदाय के साथ चर्चा की जाए और उनकी आवश्यकताओं के आधार पर विकास योजनाएं तैयार की जाएं। इसके लिए योजनाओं को डिजिटल रूप से तैयार करने और समस्याओं को गूगल शीट में अंकित करने का निर्देश दिया गया ताकि उनका समयबद्ध निराकरण हो सके।

उन्होंने कहा कि पंचायत भवन की दीवारों पर प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र व्यक्तियों के नाम अंकित किए जाएं। साथ ही, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सामाजिक कुरीतियों, वित्तीय साक्षरता और साइबर फ्रॉड के बारे में जागरूकता फैलाई जाए। कलेक्टर ने विशेष रूप से गर्भवती माताओं की समय पर जांच और नवजात शिशुओं के टीकाकरण पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अधिकारियों को आदिवासी समुदाय की संस्कृति को समझकर उनके अनुरूप कार्य करना चाहिए और स्थानीय नेतृत्व को सांस्कृतिक रूप से जोड़कर योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना चाहिए।

जिले के 73 गांवों में होगा अभियान का संचालन

सहायक आयुक्त श्री सुधीर श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण में बताया कि आदि कर्मयोगी अभियान के लिए सागर जिले के 73 गांवों का चयन किया गया है। इनमें केसली ब्लॉक के 31 गांव, देवरी के 13, रहली के 9, शाहगढ़ के 6, बंडा के 5, राहतगढ़ के 3, सागर और जैसीनगर के 2-2, तथा बीना और खुरई के 1-1 गांव शामिल हैं। प्रत्येक गांव में आदि सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जो शासकीय सेवाओं को और अधिक सुगम बनाने का कार्य करेंगे।

अभियान की संरचना और निगरानी

अभियान के सुचारू संचालन के लिए जिला स्तर पर आदि कर्मयोगी, विकासखंड स्तर पर आदि सहयोगी और ग्राम स्तर पर आदि साथी नियुक्त किए जाएंगे। ग्राम स्तर पर आदि साथी के रूप में सेवारत या सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, जनजातीय युवा, शिक्षक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, पारंपरिक ज्ञान के धारक और स्वयंसेवक शामिल होंगे। ये सभी मिलकर जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए कार्य करेंगे। अभियान की निगरानी के लिए कलेक्टर के नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस ग्रुप (डीआरजीजी) का गठन किया गया है।

भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि

कार्यक्रम की शुरुआत में कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. और अन्य अतिथियों ने भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर श्रीमती बबीता सोनी, श्री विजय जैन, श्री महेश सोनी, श्री पंकज श्रीवास्तव, श्री दीपेश जैन, श्री एन.आर. भारती सहित अन्य मास्टर ट्रेनर मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती शालिनी जैन ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन श्री विजय जैन ने किया।

अभियान का व्यापक प्रभाव

आदि कर्मयोगी अभियान का उद्देश्य न केवल आदिवासी समुदाय को शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, बल्कि उनके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान को भी सुनिश्चित करना है। यह अभियान सागर जिले के आदिवासी बहुल गांवों में विकास की नई दिशा प्रदान करने का प्रयास है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी और अधिकारियों की सक्रिय भूमिका से यह अभियान आदिवासी ग्रामों को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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