सागर में कलेक्टर सख्त: 14 अफसरों को कारण बताओ नोटिस !

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सागर, 18 सितंबर 2025

सागर जिले में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। सोमवार को कलेक्टर कार्यालय में हुई समय सीमा की बैठक में 14 अफसर बिना पूर्व सूचना दिए अनुपस्थित रहे। इस पर नाराज होकर कलेक्टर संदीप जी.आर. ने सभी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए हैं।


समय सीमा की बैठक क्यों अहम?

हर सोमवार कलेक्टर कार्यालय में होने वाली इस बैठक में जिले के प्रमुख विभागों के लंबित कार्यों की समीक्षा होती है।

  • इसमें शासकीय योजनाओं की प्रगति, जनहित के लंबित प्रकरण और समय सीमा में निपटाए जाने वाले मामलों पर चर्चा होती है।
  • अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि बिना सूचना अनुपस्थित नहीं रहना है।
  • इसके बावजूद नगर निगम आयुक्त से लेकर तहसीलदार और एसडीएम तक कई अधिकारी बैठक से नदारद रहे।

कलेक्टर ने इसे कर्तव्यों में घोर लापरवाही माना और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।


नोटिस में क्या कहा गया?

कलेक्टर कार्यालय से जारी नोटिस में साफ लिखा है—

“बैठक से अनुपस्थित रहना शासकीय सेवक के पदीय कर्तव्यों के विपरीत है। अधिकारियों का यह आचरण लापरवाही और गैरजिम्मेदारी को दर्शाता है।”

अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और चेतावनी दी गई है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


इन अफसरों को मिला नोटिस

  1. नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री
  2. सीएमएचओ डॉ. ममता तिमोरी
  3. उपसंचालक कृषि राजेश त्रिपाठी
  4. ईई पीडब्ल्यूडी साहित्य तिवारी
  5. टीएनसीपी अपूर्वा गंगरेडे
  6. डीसी होमगार्ड ललित कुमार उदय
  7. सीईओ जनपद पंचायत देवरी मनीषा चतुर्वेदी
  8. परियोजना अधिकारी हनौता सौरभ त्रिवेदी
  9. ईई ब्रिज नवीन मल्होत्रा
  10. ईई पीआईयू राजेश कुमार लिमजे
  11. तहसीलदार सागर ग्रामीण राहुल गौड़
  12. एसडीएम सागर अदिति यादव
  13. एसडीएम बीना विजय कुमार डेहरिया
  14. ईई लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी अशोक मुखाती

क्यों जरूरी है उपस्थिति?

सागर जैसे बड़े जिले में विकास कार्यों की प्रगति और जनकल्याण योजनाओं के सही क्रियान्वयन के लिए समय सीमा की बैठकें बेहद अहम मानी जाती हैं।

  • इन बैठकों के जरिये लंबित फाइलों की समीक्षा होती है।
  • विभागीय समन्वय बनता है।
  • आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा तय होती है।

ऐसे में शीर्ष अफसरों का अनुपस्थित रहना न केवल जनहित के खिलाफ है, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं के प्रति गंभीर लापरवाही भी दर्शाता है।


जिले में बना चर्चा का विषय

14 वरिष्ठ अफसरों पर नोटिस की कार्रवाई जिले में चर्चा का विषय बन गई है। यह पहली बार नहीं है जब कलेक्टर ने सख्ती दिखाई हो, लेकिन एक साथ इतने अफसरों पर कार्रवाई निश्चित रूप से प्रशासनिक हलचल का संकेत देती है।

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