सागर स्थित रविंद्र भवन में जिला पुरातत्व, पर्यटन और संस्कृति परिषद द्वारा आयोजित ‘कहत ईसुरी’ कार्यक्रम में बुंदेलखंड के लोक कवि ईसुरी की चौकड़ियों को एक नई रंगत मिली। दतिया से आए प्रसिद्ध लोकगायक विनोद मिश्र ‘सुरमणि’ ने ईसुरी की चौकड़ियों को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करते हुए कहा कि ईसुरी की चौकड़ियां मात्र मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक चेतना की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत “ऐसी नानी लगत बुंदेली…” जैसी रचनाओं से की, जिससे बुंदेलखंड की सांस्कृतिक मिठास और महिमा झलकी।

मिश्र ने “जो तुम छैल छला हो जाते…” और “जब से भई प्रीत की पीड़ा…” जैसी रचनाओं से विरह वेदना को जीवंत किया, जिसे श्रोताओं ने तालियों से सराहा। कार्यक्रम का समापन दतिया की पारंपरिक लेद गायन से हुआ। संगतकारों में ऋतुरंग मिश्र, हरनाम कुशवाहा, राहुल दुबे व डैनी रहे।

कार्यक्रम में एडीएम श्री रूपेश उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. सरोज गुप्ता, राजेंद्र दुबे, पंकज तिवारी सहित कई वरिष्ठ कलाकार एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।