मध्य प्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 18 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक आयोजित स्वच्छता उत्सव के तहत सागर में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी कड़ी में 28 सितंबर 2025 को प्रातः 10:00 बजे चिकित्सा महाविद्यालय, सागर के रेज़िडेंशियल क्षेत्र में एक भव्य स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान में चिकित्सा महाविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारियों ने श्रमदान के माध्यम से सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे स्वच्छता का संदेश न केवल परिसर में, बल्कि पूरे समुदाय में प्रभावी ढंग से प्रसारित हुआ।

स्वच्छता उत्सव: मध्य प्रदेश सरकार की पहल
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित स्वच्छता उत्सव का उद्देश्य स्वच्छ भारत मिशन को गति प्रदान करना और समाज के हर वर्ग को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। इस 15-दिवसीय अभियान के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सागर जिले में इस अभियान को कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. के मार्गदर्शन में जोश और उत्साह के साथ लागू किया जा रहा है। स्वच्छता उत्सव का 12वां दिन चिकित्सा महाविद्यालय परिसर के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि यह क्षेत्र न केवल चिकित्सा शिक्षा का केंद्र है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चिकित्सा महाविद्यालय में स्वच्छता अभियान
28 सितंबर को आयोजित स्वच्छता अभियान में चिकित्सा महाविद्यालय के रेज़िडेंशियल क्षेत्र को स्वच्छ और सुंदर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इस क्षेत्र में चिकित्सकों, शिक्षकों और कर्मचारियों के आवासीय परिसर शामिल हैं, जहां स्वच्छता बनाए रखना न केवल स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समुदाय के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण भी स्थापित करता है। अभियान के दौरान परिसर में कचरा निस्तारण, नालियों की सफाई, और हरे-भरे क्षेत्रों की देखभाल पर विशेष जोर दिया गया।
इस अवसर पर चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. ठाकुर ने स्वच्छता अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है। चिकित्सा महाविद्यालय जैसे संस्थान, जो स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी हैं, को स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को और अधिक गंभीरता से लेना चाहिए।” डॉ. ठाकुर ने यह भी जोर दिया कि स्वच्छता उत्सव का यह आयोजन समुदाय को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देने का एक सुनहरा अवसर है।

सक्रिय भागीदारी: चिकित्सा समुदाय का योगदान
इस स्वच्छता अभियान में चिकित्सा महाविद्यालय के कई वरिष्ठ चिकित्सकों और शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इनमें अधीक्षक डॉ. राजेश जैन, डॉ. सर्वेश जैन, डॉ. रुपाली जैन, डॉ. अमरनाथ गुप्ता, डॉ. मनीष जैन, डॉ. शैलेन्द्र पटेल और अन्य मेडिकल शिक्षक शामिल थे। अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. एस.पी. सिंह ने आयोजन को सुचारू रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारी श्री अभिषेक व्यास और श्री सोनू चुटीले, साथ ही हाउसकीपिंग स्टाफ ने भी श्रमदान में उत्साहपूर्वक योगदान दिया।
डॉ. राजेश जैन ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “स्वच्छता और स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। एक स्वच्छ परिवेश न केवल बीमारियों को रोकता है, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है।” उन्होंने समस्त कर्मचारियों और शिक्षकों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में स्वच्छता को प्राथमिकता दें और इसे एक आदत के रूप में अपनाएं।
श्रमदान और सामुदायिक भागीदारी
स्वच्छता अभियान की सबसे खास बात रही सामुदायिक भागीदारी। चिकित्सा महाविद्यालय के परिसर में सभी स्तर के कर्मचारियों और शिक्षकों ने एकजुट होकर श्रमदान किया। कचरे को अलग-अलग करके जैविक और अजैविक कचरे का उचित निपटान किया गया। परिसर के आसपास की सड़कों और नालियों की सफाई के साथ-साथ पेड़-पौधों की देखभाल भी की गई। इस दौरान कई शिक्षकों ने स्वच्छता के महत्व पर अपने विचार साझा किए और युवा कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया।
नोडल अधिकारी डॉ. एस.पी. सिंह ने बताया कि यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि चिकित्सा महाविद्यालय का परिसर न केवल स्वच्छ हो, बल्कि यह एक मॉडल के रूप में अन्य संस्थानों के लिए प्रेरणा बने।” उन्होंने हाउसकीपिंग स्टाफ की मेहनत की सराहना की और कहा कि उनकी सक्रियता के बिना यह अभियान इतना प्रभावी नहीं