सागर में नए साल की शुरुआत के साथ बढ़ी ठंड, न्यूनतम तापमान 7.5 डिग्री पर पहुंचा !

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सागर।
नए साल के पहले सप्ताह में ही सागर जिले में सर्दी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। बादलों की आवाजाही के बीच घना कोहरा और शीतलहर चलने से दिन एवं रात के तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। सोमवार सुबह न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 7.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जबकि एक दिन पहले यह 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। तापमान में अचानक आई गिरावट से आम जनजीवन प्रभावित होने लगा है।

घने कोहरे में हेडलाइट जलाकर चले वाहन

सोमवार सुबह शहर घने कोहरे की चादर में लिपटा रहा। कई क्षेत्रों में दृश्यता बेहद कम रही, जिससे वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर आवागमन करना पड़ा। सुबह की सर्द हवाओं ने ठिठुरन और बढ़ा दी। मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों में रात के तापमान में करीब 2.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। विभाग ने अगले दो दिनों तक इसी तरह ठंड बढ़ने और तापमान में और गिरावट आने की संभावना जताई है।

सुबह 9.30 बजे तक नहीं छंटा कोहरा

घना कोहरा सोमवार सुबह 9.30 बजे तक बना रहा, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, कामकाजी लोगों और वाहन चालकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। कोहरे के कारण सड़कों पर रफ्तार धीमी रही और कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ।

ठंड को देखते हुए बदला गया स्कूलों का समय

बढ़ती ठंड और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों के समय में बदलाव किया है। आदेश के अनुसार सोमवार से नर्सरी से कक्षा 8वीं तक की कक्षाएं सुबह 9.30 बजे से संचालित की जाएंगी। यह व्यवस्था ठंड के प्रभाव कम होने तक लागू रहेगी।

फसलों पर पाले का खतरा, किसानों को सलाह

लगातार गिरते तापमान से फसलों पर पाले का खतरा मंडराने लगा है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि यदि तापमान 6 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है, तो खेतों की मेड़ों पर सूखा एवं गीला कचरा जलाकर धुआं करना चाहिए, जिससे तापमान स्थिर रहता है और फसल पाले से सुरक्षित रहती है।
वैज्ञानिकों ने गेहूं की फसल में पीलापन दूर करने के लिए एनपीके एवं जिंक सल्फेट के छिड़काव की सलाह दी है। वहीं धनिया और मसूर की फसलों में माहू (एफिड) का प्रकोप दिखाई देने पर उपयुक्त कीटनाशक के प्रयोग की अनुशंसा की गई है।

ठंड से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि अत्यधिक ठंड से 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, हृदय व सांस रोगी तथा बेघर व्यक्ति अधिक जोखिम में रहते हैं।
हाइपोथर्मिया को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है। इसके लक्षण दिखने पर मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना चाहिए। यदि त्वचा में सुन्नता, सफेदी या काले छाले दिखाई दें, तो यह फ्रॉस्टबाइट के संकेत हो सकते हैं, जिनके लिए तुरंत चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है।

स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि इमरजेंसी सेवाएं, आवश्यक दवाइयां, कंबल एवं चिकित्सा उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखें। नागरिकों से अपील की गई है कि ठंडी हवा से बचें, अनावश्यक यात्रा न करें, संतुलित आहार लें, विटामिन-सी युक्त फल-सब्जियों एवं गर्म तरल पदार्थों का सेवन करें।

विशेषज्ञों ने बताया कि गंभीर हाइपोथर्मिया की स्थिति में व्यक्ति बेहोश हो सकता है और उसकी नाड़ी व सांस की गति धीमी हो जाती है। ऐसे मामलों में तत्काल आपातकालीन सहायता लेना आवश्यक है। लंबे समय तक ठंड के संपर्क में रहने से शरीर के खुले हिस्सों—जैसे उंगलियां, पैर के पंजे, नाक और कान—पर काले छाले पड़ सकते हैं। शीतलहर के दौरान सर्दी-खांसी, नाक बहना और नाक से खून आने जैसी समस्याओं की आशंका भी बढ़ जाती है।

प्रशासन ने नागरिकों से ठंड के दौरान सतर्क रहने, आवश्यक सावधानियां अपनाने और स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।

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