सागर में नाबालिग के प्रसव का मामला: अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन के बीच गहराया विवाद।

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सागर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत एक निजी अस्पताल में नाबालिग युवती का प्रसव कराने का मामला तूल पकड़ रहा है। बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड की टीम ने अस्पताल में अचानक छापा मारकर नाबालिग प्रसूता को उसके नवजात बच्चे के साथ सीढ़ियों के नीचे से बरामद किया। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और बाल कल्याण समिति के बीच तीखी बहस हुई।

घटना का विवरण

बाल कल्याण समिति अध्यक्ष किरण शर्मा के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि अस्पताल में एक नाबालिग का प्रसव कराया गया है, जिसकी कोई आधिकारिक सूचना न तो पुलिस को दी गई थी और न ही प्रशासन को। जब टीम मौके पर पहुंची तो अस्पताल प्रबंधन घबरा गया और प्रसूता को नवजात बच्चे के साथ सीढ़ियों के नीचे छिपा दिया।निरीक्षण के दौरान टीम को सीढ़ियों के नीचे खून से सने कपड़ों में बैठी नाबालिग युवती मिली, जो नवजात शिशु को गोद में लिए हुए थी। अस्पताल के रिकॉर्ड में न तो युवती का नाम दर्ज था और न ही उसके परिजनों की जानकारी दी गई थी। टीम ने अस्पताल प्रबंधन पर कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई का संकेत दिया है।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष

अस्पताल प्रबंधन ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि 26 नवंबर 2024 की सुबह लगभग 6-7 बजे एक गर्भवती महिला को गंभीर स्थिति में लाया गया था। महिला के साथ उसके मामा माखनलाल यादव और एक छोटी लड़की मौजूद थे। प्रबंधन के अनुसार, अस्पताल के गेट से कैजुअल्टी वार्ड तक ले जाते समय ही महिला की डिलीवरी हो गई।

अस्पताल ने तत्काल महिला का इलाज शुरू किया और नवजात शिशु का सुरक्षित जन्म हुआ। प्रबंधन का कहना है कि मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उनकी प्राथमिकता इलाज करना था, न कि दस्तावेजों की जांच।

अस्पताल के अनुसार, परिजनों ने पहले पहचान पत्र देने में असमर्थता जताई और जल्दबाजी में अस्पताल से चले गए। इसके बाद मरीज की दादी और एक छोटी लड़की अस्पताल में आईं, जिन्होंने मरीज की देखभाल की और फीस जमा की।

प्रबंधन का कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि महिला नाबालिग और अविवाहित थी। यह जानकारी परिजनों ने अस्पताल से छुपाई, जिससे अस्पताल की स्थिति और जटिल हो गई।

कानूनी और नैतिक प्रश्न

इस मामले ने कई कानूनी और नैतिक प्रश्न खड़े कर दिए हैं।1. अस्पताल की जिम्मेदारी:अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने बिना दस्तावेज और प्रशासनिक अनुमति के प्रसव क्यों कराया।

  1. क्या यह चिकित्सा नियमों का उल्लंघन नहीं है?
  2. परिजनों की भूमिका:परिजनों द्वारा अस्पताल को युवती की वास्तविक उम्र और वैवाहिक स्थिति की जानकारी छुपाना गंभीर मामला है। इससे अस्पताल के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो गया।
  3. बाल कल्याण समिति की प्रतिक्रिया:बाल कल्याण समिति का कहना है कि नाबालिग के प्रसव के मामले में कानून का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
  4. समाज पर प्रभाव और आगे की राह
  5. यह मामला समाज के उन पहलुओं को उजागर करता है जहां नाबालिग लड़कियों के शोषण और उनके अधिकारों की अनदेखी होती है। अस्पतालों और प्रशासन को इस प्रकार की घटनाओं से निपटने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों की आवश्यकता है।इस घटना ने न केवल चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता के सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज के सामने यह चुनौती भी रखी है कि ऐसी घटनाओं को दोबारा न होने दिया जाए।

सागर जिले का यह मामला केवल एक अस्पताल या नाबालिग के प्रसव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी समाजिक और कानूनी व्यवस्था की खामियों को भी उजागर करता है। अब देखना यह है कि बाल कल्याण समिति और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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