मध्य प्रदेश के सागर जिले में पारंपरिक खेती और देसी बीजों को संरक्षित करने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की गई है। जिले के 13 गांवों में गौशालाओं को “बीज बैंक” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पुरातन और दुर्लभ बीजों का संग्रहण और संरक्षण किया जाएगा।
लुप्त हो रहे देसी बीजों को बचाने की कोशिश
समय के साथ खेती में हाइब्रिड बीजों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिसके कारण पारंपरिक बीजों की कई प्रजातियां धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही हैं। इनमें लौकी, गिलकी, कद्दू, गेहूं, चना, अरहर, कुटकी, बाजरा और ज्वार जैसी फसलों के देसी बीज शामिल हैं।
इन पारंपरिक बीजों में जहां स्वाद और पोषण अधिक होता है, वहीं इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर मानी जाती है। हालांकि इनका उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से ये अधिक लाभकारी होते हैं।

गौशालाओं को बनाया जा रहा केंद्र
इस पहल के तहत जिले की गौशालाओं को बीजों के संरक्षण का केंद्र बनाया जा रहा है। यहां विभिन्न गांवों से पुराने और दुर्लभ बीजों को एकत्र कर सुरक्षित रखा जाएगा। यह बीज बैंक भविष्य में किसानों को शुद्ध और पारंपरिक बीज उपलब्ध कराने में सहायक होगा।
कलेक्टर की पहल
इस योजना के पीछे कलेक्टर संदीप जी.आर. की विशेष पहल है। उनके अनुसार, प्राकृतिक रूप से शुद्ध बीजों में न केवल रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है, बल्कि इनमें कीटनाशकों की आवश्यकता भी कम पड़ती है।
उन्होंने बताया कि ऐसे बीज कठिन मौसम परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखते हैं, जिससे किसानों को लाभ हो सकता है।
किसानों और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
देसी बीजों के उपयोग से खेती अधिक प्राकृतिक और सुरक्षित बन सकती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
इसके अलावा, इन बीजों से तैयार फसलें स्वास्थ्य के लिए भी अधिक लाभकारी मानी जाती हैं, क्योंकि इनमें रासायनिक अवशेष कम होते हैं।

जैव विविधता का संरक्षण
यह पहल केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। पारंपरिक बीजों को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
सागर जिले में शुरू की गई यह पहल पारंपरिक खेती को पुनर्जीवित करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है। गौशालाओं में बीज बैंक की स्थापना से न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि समाज को भी स्वस्थ और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सकेंगे।
यदि यह प्रयास सफल होता है, तो यह अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है।