सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) की स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर और सक्षम बनाने की दिशा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत केन फिन होम्स लिमिटेड ने अस्पताल को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण दान किए, जिनका लोकार्पण एक गरिमामयी समारोह में हुआ। इस दौरान दानकर्ताओं का सम्मान भी किया गया।
आधुनिक उपकरणों से बढ़ेगी अस्पताल की क्षमता
CSR के तहत बीएमसी को कई महत्वपूर्ण मशीनें प्रदान की गई हैं, जिनमें शामिल हैं—
- डायलिसिस मशीन – गुर्दा रोगियों को समय पर और सुचारू उपचार के लिए
- ओटी (OT) लाइट – ऑपरेशन थिएटर में बेहतर, केंद्रित और सटीक रोशनी व्यवस्था के लिए
- कौटरी मशीन – जटिल और नाजुक सर्जरी के दौरान उपयोग हेतु
- वाटर कूलर – मरीजों एवं उनके परिजनों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए

इन उपकरणों के जुड़ने से अस्पताल की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। विशेष रूप से गरीब और गंभीर मरीजों को समय पर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
समारोह में अधिष्ठाता ने किया पूजन—‘मानव सेवा का सर्वोत्तम स्वरूप’ बताया
कार्यक्रम के दौरान अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. ठाकुर ने मशीनों का पूजन किया और कहा—
“पीड़ित मानवता के हित में किया गया दान सर्वश्रेष्ठ है। इन उपकरणों से एक ओर अस्पताल की क्षमता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आधुनिक इलाज का लाभ मिलेगा।”
अधीक्षक डॉ. राजेश जैन और डॉ. रमेश पांडे ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नए उपकरणों के जुड़ने से उपचार की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार आएगा।
मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने कहा कि ये मशीनें अस्पताल की तात्कालिक आवश्यकता थीं और इनके मिलने से कई विभागों का कार्य बेहतर तरीके से हो सकेगा।

अनेक वरिष्ठ चिकित्सक और प्रतिनिधियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में बीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सक और अनेक अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं—
- डॉ. दीपक श्रीवास्तव
- डॉ. मनीष जैन
- डॉ. ज्योति तिवारी
- डॉ. ओंकार सिंह
- केन फिन होम्स के प्रतिनिधि श्री दीपक और देवेंद्र काछी
सहायक अधीक्षक डॉ. एस.पी. सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
समन्वय और संचालन की महत्वपूर्ण भूमिका
स्टोर प्रभारी डॉ. ओमकार ठाकुर और इंजीनियर श्री ऋग्वेद त्रिपाठी ने केन फिन होम्स लिमिटेड के साथ समन्वय स्थापित कर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का संचालन भी श्री ऋग्वेद त्रिपाठी द्वारा किया गया।