घटना का संक्षिप्त विवरण:
ग्राम खेराई, जो कि मालथौन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, वहां स्थित प्राचीन बांके बिहारी मंदिर की जमीन को लेकर बीते दो दिनों से विवाद की स्थिति बनी हुई है। मंदिर के नाम पर दर्ज लगभग 4 एकड़ भूमि पर कुछ स्थानीय लोगों द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया गया है। जब गांव के कुछ लोग रविवार शाम को ट्रैक्टर लेकर भूमि की जुताई के लिए पहुंचे, तो कथित कब्जाधारियों ने उन पर मारपीट और अभद्रता की।

घटना का क्रम:
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रविवार शाम (15 जून 2025)
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गांव के कुछ लोगों ने मंदिर की भूमि पर खेती की तैयारी के लिए ट्रैक्टर मंगवाया।
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इस दौरान कथित कब्जाधारियों ने विरोध किया और हिंसक झड़प हुई।
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सूचना मिलते ही मालथौन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को तत्काल शांत कराया।
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सोमवार सुबह (16 जून 2025)
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घटना के अगले दिन गांव में तनाव और अधिक बढ़ गया।
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लोग डंडे लेकर सड़कों पर उतर आए और मंदिर की भूमि को लेकर आक्रोश जताया।
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गांव में भीड़ जुटने लगी, जिससे सांप्रदायिक या जातीय टकराव की आशंका भी उत्पन्न हुई।
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पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई:
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जैसे ही सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को मिली, मालथौन के अलावा खुरई, बीना, आगासौद सहित अन्य थाना क्षेत्रों की पुलिस बल मौके पर भेजी गई।
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एसडीएम मनोज चौरसिया, पुलिस अधिकारी और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाइश दी।
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स्थिति को नियंत्रण में लिया गया और भीड़ को तितर-बितर किया गया।
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सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल की तैनाती की गई है।
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प्रशासनिक प्रतिक्रिया:
एसडीएम मनोज चौरसिया ने मीडिया से बातचीत में बताया:
“बांके बिहारी मंदिर की 4 एकड़ जमीन राजस्व रिकॉर्ड में मंदिर के नाम दर्ज है। कुछ लोगों द्वारा इस पर अवैध कब्जा कर लिया गया था। विवाद के दौरान मारपीट की घटना सामने आई है। फिलहाल स्थिति शांत है और प्रशासन द्वारा मंदिर समिति को पुनः भूमि का वैध कब्जा सौंपा जा रहा है।”
वर्तमान स्थिति:
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गांव में अस्थायी तौर पर पुलिस बल तैनात है।
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कोई नई हिंसा की सूचना नहीं है।
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प्रशासन ने भूमि की माप-जांच शुरू कर दी है।
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संबंधित राजस्व और पुलिस विभाग रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
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शांति समिति की बैठक आयोजित कर, ग्रामीणों से संयम बनाए रखने की अपील की गई है।

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यह घटना दर्शाती है कि धार्मिक स्थलों की संपत्ति पर विवाद से सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता है।
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प्रशासन को चाहिए कि धार्मिक या सार्वजनिक ट्रस्टों की भूमि पर समय-समय पर निरीक्षण और रिकॉर्ड अद्यतन कराए जाएं।
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भूमि विवाद की स्थायी समाधान हेतु राजस्व न्यायालय और पंचायत स्तर पर मध्यस्थता की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाए।
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ग्रामीणों में कानूनी जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, ताकि वे सही प्रक्रिया अपनाकर अपने अधिकार सुनिश्चित करें।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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