सागर, मध्य प्रदेश: सागर के मोतीनगर थाना क्षेत्र के बाईसा मोहल्ला में नल-पाइप फिटिंग का काम करते समय करंट लगने से 20 वर्षीय मजदूर सागर गोस्वामी की मौत के मामले में पुलिस ने मंगलवार, 2 सितंबर 2025 को मकान मालिक आशीष सेठ और ठेकेदार सोनू विश्वकर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच में पाया गया कि मकान मालिक और ठेकेदार ने मजदूर को पर्याप्त सुरक्षा संसाधन (सेफ्टी किट) उपलब्ध नहीं कराए, जिसके कारण यह दुखद हादसा हुआ। पुलिस ने साक्षियों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, शव पंचनामा, और घटनास्थल के निरीक्षण के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घटना का विवरण
मोतीनगर पुलिस के अनुसार, फरियादी मुन्ना उर्फ रामकरण गोस्वामी, निवासी संत रविदास वार्ड, ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका 20 वर्षीय बेटा सागर उर्फ वीरेंद्र गोस्वामी 14 अगस्त 2025 को अपने दोस्त सोनू विश्वकर्मा के साथ बाईसा मोहल्ला में नल और पाइप फिटिंग का काम करने गया था। यह काम मकान मालिक आशीष सेठ के निर्माणाधीन मकान में चल रहा था। काम के दौरान सागर को बिजली का करंट लग गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
सोनू विश्वकर्मा के भतीजे अमित को इस घटना की सूचना मिली, जिसने तुरंत सागर के परिजनों को फोन कर बताया कि उसे करंट लग गया है और उसे अस्पताल ले जाया जा रहा है। परिजन तुरंत मोतीनगर चौराहे पर पहुंचे, जहां से सागर को गंभीर हालत में सागर के बंडल मेडिकल कॉलेज (BMC) ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद सागर को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही मोतीनगर पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान साक्षियों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, और घटनास्थल के निरीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि सागर को काम के दौरान कोई सुरक्षा उपकरण, जैसे इंसुलेटेड दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट, या अन्य सुरक्षात्मक गियर, उपलब्ध नहीं कराए गए थे। पुलिस ने इस लापरवाही के लिए मकान मालिक आशीष सेठ और ठेकेदार सोनू विश्वकर्मा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304A (लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना) के तहत मामला दर्ज किया है।
परिजनों का आरोप
सागर के पिता रामकरण गोस्वामी ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करता था। उन्होंने आरोप लगाया कि मकान मालिक और ठेकेदार की लापरवाही के कारण उनके बेटे की जान गई। रामकरण ने कहा, “सागर को कोई सेफ्टी किट नहीं दी गई थी। अगर उसे उचित सुरक्षा उपकरण दिए गए होते, तो शायद यह हादसा टल सकता था।” परिजनों का कहना है कि सागर उनके परिवार का मुख्य कमाने वाला था, और उसकी मौत से परिवार पर आर्थिक और भावनात्मक संकट आ गया है।
सुरक्षा संसाधनों की कमी एक गंभीर समस्या
यह मामला निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। सागर में हाल के वर्षों में करंट लगने या निर्माण कार्य के दौरान हादसों में कई मजदूरों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में ठेकेदार और मकान मालिक लागत कम करने के लिए सुरक्षा उपकरणों पर ध्यान नहीं देते, जिससे मजदूरों की जान जोखिम में पड़ती है।
पुलिस की आगे की जांच
मोतीनगर थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय मकान में बिजली की आपूर्ति किस तरह से थी और क्या कोई सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था। इसके अलावा, पुलिस अन्य साक्षियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि हादसे की पूरी परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। दोनों आरोपियों, आशीष सेठ और सोनू विश्वकर्मा, से पूछताछ की जाएगी, और यदि आवश्यक हुआ तो उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है।
सामाजिक और कानूनी प्रभाव
इस घटना ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है। सागर के परिजनों और स्थानीय लोगों ने मकान मालिक और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कुछ सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को उठाते हुए निर्माण स्थलों पर मजदूरों के लिए अनिवार्य सुरक्षा उपायों की मांग की है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में अगर लापरवाही सिद्ध हो जाती है, तो आरोपियों को धारा 304A के तहत 2 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, परिजन मुआवजे की मांग के लिए सिविल कोर्ट में भी मामला दायर कर सकते हैं।
निष्कर्ष
सागर गोस्वामी की मौत ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि यह समाज और प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि मजदूरों की जान की कीमत पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। पुलिस की जांच और कोर्ट की कार्रवाई से यह तय होगा कि इस मामले में न्याय मिलता है या नहीं।