सागर।
मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह शासकीय अल्प प्रवास पर सागर पहुँचे। उनके सागर आगमन पर प्रशासनिक अधिकारियों, गणमान्य नागरिकों एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया।
अल्प प्रवास के दौरान मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने आयुक्त सागर संभाग सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में जिले से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें विशेष रूप से पेयजल में प्रदूषण, कानून व्यवस्था की स्थिति, राजस्व अभिलेखों का अद्यतीकरण तथा मानव अधिकारों से संबंधित लंबित प्रकरण प्रमुख रहे।
डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल स्रोतों की नियमित जांच और साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार का जल प्रदूषण न हो और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।

कानून व्यवस्था के संबंध में उन्होंने निर्देश दिए कि जिले में शांति, सुरक्षा और सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस आपसी समन्वय से कार्य करें। संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाए तथा किसी भी प्रकार की स्थिति बिगड़ने से पहले त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राजस्व विभाग को निर्देशित करते हुए मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष ने कहा कि राजस्व अभिलेखों का अद्यतीकरण और डिजिटलीकरण समयबद्ध रूप से किया जाए, ताकि आम नागरिकों को राजस्व से संबंधित सेवाएं सरलता और पारदर्शिता के साथ मिल सकें।

बैठक में मानव अधिकारों से जुड़े लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे सभी मामलों में तत्परता और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि मानव अधिकारों का संरक्षण आयोग का प्रमुख दायित्व है और प्रशासन को इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखना चाहिए।
बैठक के दौरान अधिकारियों द्वारा जिले की वर्तमान स्थिति, प्रशासनिक चुनौतियों एवं किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष ने सभी अधिकारियों को सजग, सतर्क और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का संदेश दिया, ताकि समाज में मानव अधिकारों की रक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके।