सागर, 08 सितंबर 2025।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक विभाग एवं फिजियोथेरेपी विंग द्वारा 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष का विषय था – “स्वस्थ वृद्धावस्था”, जिसे लेकर कार्यक्रम में चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों और छात्रों ने व्यापक सहभागिता दिखाई।

कार्यक्रम का प्रारंभ और मुख्य अतिथि
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती वर्षा ठाकुर रहीं। अध्यक्षता अधिष्ठाता डॉ. पी. एस. ठाकुर, अधीक्षक डॉ. राजेश जैन और अस्थि रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र चौबे ने की।
कार्यक्रम में सभी विभागाध्यक्ष और संकाय सदस्य उपस्थित थे, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और प्रभाव बढ़ा।
फिजियोथेरेपी और स्वस्थ वृद्धावस्था
वक्ता और विशेषज्ञों ने बताया कि फिजियोथेरेपी केवल रोग के बाद पुनर्वास तक सीमित नहीं है। यह:
- बढ़ती उम्र में होने वाली शारीरिक समस्याओं को रोकने,
- जीवन को सक्रिय और स्वस्थ बनाए रखने,
- और बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने
में अत्यंत सहायक है।
ऑर्थोपेडिक विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. गौरव अग्रवाल ने व्याख्यान के माध्यम से उपस्थित लोगों को स्वस्थ और सक्रिय वृद्धावस्था का संदेश दिया।
प्रतियोगिताएं और सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रों और चिकित्सकों के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं:
- छात्रों के लिए पोस्टर प्रतियोगिता
- डॉक्टरों के लिए फिटनेस प्रतियोगिता
इनमें सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी रचनात्मकता और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन किया।
अस्थि रोग विभाग के शिक्षकों – डॉ. अंशुल गुप्ता, डॉ. प्रेमचंद अहिरवार, तकनीकी स्टाफ और विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम का संचालन फिजियोथेरेपी विंग के प्रभारी डॉ. सुरेंद्र कुमार पड़रया, डॉ. अर्चना वर्मा, डॉ. श्रुति शर्मा और भूपेन्द्र कुर्मी ने किया।
मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि कार्यक्रम ने छात्रों और चिकित्सकों दोनों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और फिजियोथेरेपी के महत्व के प्रति जागरूक किया।
मुख्य अतिथि और अध्यक्षगण की शिष्ट संदेश
मुख्य अतिथि और अध्यक्षगण ने कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों और फिजियोथेरेपिस्ट को बधाई दी और कहा कि आने वाले समय में फिजियोथेरेपी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी।
निष्कर्ष
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस का यह आयोजन न केवल स्वस्थ वृद्धावस्था के संदेश को समाज तक पहुँचाने में सफल रहा, बल्कि छात्रों, चिकित्सकों और तकनीकी स्टाफ को फिजियोथेरेपी के महत्व और उसके व्यावहारिक उपयोग से अवगत कराने में भी सहायक साबित हुआ।