सागर में वेयरहाउस आय वृद्धि कार्यशाला: गोदाम संचालकों को बहुआयामी व्यावसायिक अवसरों पर मार्गदर्शन !

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सागर,मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने और गोदाम संचालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से “वेयर हाउस की आय वृद्धि के अन्य व्यावसायिक उपयोग” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस अवसर पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कई वेयरहाउस अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, जिससे गोदाम संचालकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मंत्री राजपूत ने बताया कि अब गोदामों का उपयोग केवल अनाज भंडारण तक सीमित न रहकर उन्हें बहुआयामी व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। वैकल्पिक भंडारण और अन्य व्यावसायिक उपयोग से गोदाम संचालकों की आय में वृद्धि की संभावना है। उन्होंने कार्यशाला को औपचारिक नहीं बल्कि परिणाममूलक बताया और कहा कि इसका उद्देश्य निजी निवेश से बने गोदामों में सरकारी अनाज भंडारण के साथ-साथ अन्य माध्यमों से आय अर्जन के अवसर विकसित करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि शासन की नीतियों, नियमों और उपलब्ध योजनाओं की स्पष्ट जानकारी गोदाम संचालकों को प्रदान की जा रही है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ निवेश और व्यावसायिक निर्णय ले सकें। मंत्री ने निजी गोदाम संचालकों की भूमिका को प्रदेश की भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

कार्यशाला की शुरुआत अपर मुख्य सचिव रश्मि अरूण शमी द्वारा कार्यशाला के उद्देश्यों के परिचय से हुई। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में खुले में अनाज भंडारण नहीं किया जाता, लेकिन भंडारण क्षमता अधिक होने से गोदाम संचालकों को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस कार्यशाला में विशेषज्ञ गोदाम संचालकों को आधुनिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों ने गोदामों के बहुआयामी उपयोग और व्यावसायिक अवसरों पर विस्तृत विचार साझा किए।

  • प्रो. वीपन कुमार और सुमिता नारायण (IIM मुंबई) ने “ट्रांसफार्मिंग पब्लिक गोडाउन्स टू प्रायवेट वेयरहाउसेस – केस ऑफ अदर स्टेटस्” पर विचार रखे।
  • डॉ. गोपाल मोर (Scaler Space, मुसद्दीलाल ग्रुप) ने प्राइवेट वेयरहाउसिंग मार्केट और नए व्यवसाय स्थापित करने के दृष्टिकोण पर चर्चा की।
  • नितिन चंद्रा (CBRC, दिल्ली) ने प्राइवेट वेयरहाउसिंग मार्केट में प्रचलित कॉमर्शियल स्ट्रक्चर्स और गोदाम मालिकों के लिए वैकल्पिक आय के अवसर साझा किए।
  • सुदीप शौर्य (MPIDC) ने एमपी लॉजिस्टिक्स पॉलिसी के तहत उपलब्ध इंसेंटिव्स की जानकारी दी।
  • अनुराग गुप्ता (Delight) ने गोदामों के आधुनिकीकरण और उन्हें आधुनिक सुविधाओं वाले केंद्र में बदलने के तरीकों पर चर्चा की।

विशेषज्ञों ने गोदामों में लॉजिस्टिक्स सेवाएँ, मल्टी-कमोडिटी स्टोरेज, ई-कॉमर्स सपोर्ट, पैकेजिंग, ग्रेडिंग, कोल्ड-चेन, मूल्य संवर्धन, वेयरहाउस ऑटोमेशन और डिजिटलीकरण जैसी आधुनिक तकनीकों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। साथ ही कृषि आधारित वेयरहाउस को कमर्शियल वेयरहाउस में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

अनुराग वर्मा (MD, मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन) ने कहा कि कार्यशाला में प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों पर विचार कर इन्हें लागू किया जाएगा। इस अवसर पर आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा सहित अन्य अधिकारी और वेयरहाउस संचालक उपस्थित थे।

मंत्री राजपूत ने अंत में कहा कि इस तरह की कार्यशालाएँ अन्य जिलों में भी आयोजित की जाएंगी, ताकि प्रदेश के वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को नई दिशा दी जा सके और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान मिल सके।

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