सागर में सीएम मोहन यादव का दौरा, चीता प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार !

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मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व आज एक बड़े और महत्वपूर्ण कार्यक्रम का गवाह बनने जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने जन्मदिन के अवसर पर यहां पहुंचेंगे और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई अहम कार्यों की शुरुआत करेंगे।

इस दौरे का सबसे खास पहलू है चीता प्रोजेक्ट के तहत ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ का भूमिपूजन और बामनेर नदी में कछुओं को छोड़े जाने का कार्यक्रम। यह पहल प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


सीएम का दौरा: जन्मदिन पर पर्यावरण को समर्पित पहल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्राथमिकता को भी दर्शाता है। अपने जन्मदिन के अवसर पर वे किसी समारोह के बजाय वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़े कार्यों में भाग लेकर एक सकारात्मक संदेश देना चाहते हैं।

हालांकि देर रात तक आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं हुआ था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं।


क्या है ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’?

चीता प्रोजेक्ट के तहत बनाया जाने वाला सॉफ्ट रिलीज बोमा एक विशेष प्रकार का बाड़ा (enclosure) होता है, जहां बाहर से लाए गए चीतों को कुछ समय के लिए रखा जाता है।

इसका उद्देश्य होता है:

  • नए वातावरण के अनुसार चीतों को ढालना
  • उन्हें प्राकृतिक शिकार के लिए तैयार करना
  • तनाव कम करना और अनुकूलन बढ़ाना

जब चीते पूरी तरह से नए वातावरण में सहज हो जाते हैं, तब उन्हें खुले जंगल में छोड़ दिया जाता है। यह प्रक्रिया चीतों के सुरक्षित पुनर्वास के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।


कूनो से आएंगे चीते: नए आवास की तैयारी

मध्य प्रदेश में पहले से चल रहे चीता प्रोजेक्ट भारत के तहत अब चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान से सागर के इस टाइगर रिजर्व में लाने की योजना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का भूगोल और जलवायु चीतों के लिए अनुकूल है। यहां का खुला घास का मैदान और शिकार की उपलब्धता इसे एक आदर्श आवास बनाती है।


कछुओं का संरक्षण: बामनेर नदी में छोड़े जाएंगे 12 कछुए

सीएम अपने दौरे के दौरान बामनेर नदी में 12 कछुओं को भी छोड़ेंगे। यह पहल नदी पारिस्थितिकी (ecosystem) को संतुलित रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

कछुए जल स्रोतों को साफ रखने में मदद करते हैं और जैव विविधता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह कदम नदियों के संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।


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