परिवहन आयुक्त, मध्यप्रदेश ग्वालियर एवं कलेक्टर सागर के निर्देशानुसार स्लीपर यात्री बसों, स्कूल बसों एवं अवैध रूप से संचालित वाहनों की जांच के संबंध में सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, सागर द्वारा आज दिनांक 17 जनवरी 2026 को मुख्य बस स्टैंड, नरसिंहपुर रोड एवं भोपाल रोड क्षेत्र में स्लीपर यात्री बसों एवं अन्य वाहनों की व्यापक जांच की गई।
जांच के दौरान कुल 32 स्लीपर यात्री बसों एवं अन्य वाहनों की जांच की गई। इस दौरान 8 यात्री बसों में गंभीर सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं। इन बसों में अग्निशमन यंत्र निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, कुछ बसों में निर्गम (एग्जिट) की व्यवस्था मानक अनुसार नहीं थी, स्लीपर बर्थ पर स्लाइडर लगे हुए पाए गए तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा उपायों का भी अभाव था। इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित बस संचालकों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई और कुल 55,000 रुपये का जुर्माना वसूल किया गया।

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने बताया कि स्लीपर कोच यात्री बसों में एआईएस-119 के प्रावधानों के तहत सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। इन प्रावधानों की पूर्णता की जांच हेतु जिले की समस्त स्लीपर बसों को दिनांक 18 जनवरी 2026 को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, सागर परिसर में खड़ा किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में जिला बस ऑपरेटर एसोसिएशन को सूचना भी जारी कर दी गई है। जांच के उपरांत केवल उन्हीं स्लीपर बसों को संचालन की अनुमति दी जाएगी, जो निर्धारित मानकों की पूर्ति करती होंगी।

एआईएस-119 के अंतर्गत स्लीपर यात्री बसों के लिए प्रमुख आवश्यक शर्तें इस प्रकार हैं—
- आगमन एवं निर्गमन के लिए पृथक-पृथक दो दरवाजे अनिवार्य होंगे।
- वाहन में कुल चार इमरजेंसी एग्जिट होना आवश्यक है, जिनमें एक ड्राइवर साइड पीछे की ओर, एक वाहन के पीछे बीच में तथा दो वाहन की छत पर आगे एवं पीछे की ओर होंगे। प्रत्येक इमरजेंसी एग्जिट का आकार 58 सेंटीमीटर × 90 सेंटीमीटर होना चाहिए।
- अग्नि सुरक्षा की दृष्टि से 10 किलोग्राम क्षमता के दो अग्निशमन यंत्र बस में अनिवार्य रूप से होने चाहिए, जिन्हें आगे एवं पीछे की ओर रखा जाएगा।
- किसी भी वाहन में ड्राइवर पार्टीशन डोर नहीं होना चाहिए।
- किसी भी स्लीपर बर्थ पर स्लाइडर नहीं होना चाहिए, हालांकि आसानी से खुलने वाले पर्दे लगाए जा सकते हैं।

परिवहन विभाग ने समस्त स्लीपर यात्री बस संचालकों से अपील की है कि वे निर्धारित सुरक्षा मानकों की पूर्ण पूर्ति के बाद ही बसों का संचालन करें। जांच के दौरान यदि भविष्य में किसी भी बस में उक्त मानकों के अनुरूप कमी पाई जाती है, तो मोटरयान अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एवं सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम करना है।