मध्य प्रदेश के सागर में भ्रष्टाचार के एक अहम मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की पीआईयू इकाई में पदस्थ रहे तत्कालीन परियोजना यंत्री मुलायम प्रसाद अहिरवार (64) को रिश्वत लेने का दोषी पाते हुए 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी पर 40 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
मामला क्या था?
यह पूरा मामला वर्ष 2016-17 में हुए एक निर्माण कार्य से जुड़ा है। खुरई में इंडोर स्टेडियम निर्माण का करीब 90 लाख रुपए का टेंडर जारी हुआ था, जिसे ठेकेदार नीलेश कुमार दीक्षित ने लिया था। कार्य के दौरान लगभग 15 लाख रुपए के बिलों का भुगतान लंबित था।
अभियोजन के अनुसार, इन बिलों को पास कराने के लिए तत्कालीन परियोजना यंत्री मुलायम प्रसाद अहिरवार ने ठेकेदार से 1.5% कमीशन की मांग की थी।
शिकायत और लोकायुक्त की कार्रवाई

ठेकेदार ने इस मांग से परेशान होकर लोकायुक्त पुलिस के एसपी कार्यालय, सागर में शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए।
इसके बाद लोकायुक्त टीम ने 10 जनवरी 2022 को एक ट्रैप प्लान किया। योजना के तहत फरियादी को 20 हजार रुपए रिश्वत के तौर पर देने भेजा गया। जैसे ही आरोपी यंत्री ने यह राशि ली, टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया।
कोर्ट में सुनवाई और फैसला
मामले की जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया गया।
विशेष न्यायाधीश शहाबुद्दीन हाशमी की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सभी जरूरी साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत किए। शासन की ओर से एडीपीओ एलपी कुर्मी ने पैरवी की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध ठोस साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने मुलायम प्रसाद अहिरवार को दोषी करार दिया और:
- 4 वर्ष का सश्रम कारावास
- 40,000 रुपए का जुर्माना
की सजा सुनाई।
क्या है इस फैसले का महत्व?
यह फैसला सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। लोकायुक्त की सक्रियता और न्यायालय की सख्ती से यह स्पष्ट होता है कि रिश्वतखोरी के मामलों में अब सख्त कार्रवाई की जा रही है।