सागर स्थित डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के जंगल क्षेत्र में शनिवार रात अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते आग ने भीषण रूप ले लिया और सूखे पत्तों के कारण तेजी से फैलने लगी। जंगल से उठती धुआं और ऊंची लपटों को देखकर आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गर्मी का मौसम शुरू होते ही जंगल में बड़ी मात्रा में सूखे पत्ते जमा हो गए हैं, जिससे आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। शनिवार रात अचानक जंगल के एक हिस्से में आग लग गई, जो तेजी से फैलकर पेड़ों और बांस के झाड़ियों तक पहुंच गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि दूर से ही धुआं दिखाई देने लगा।
मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही सुरक्षाकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आग बुझाने की कोशिश शुरू की। साथ ही फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी गई, लेकिन आग जिस स्थान पर लगी थी वहां तक फायर वाहन नहीं पहुंच सका।

ऐसे में स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने मिलकर काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। कई घंटों की मेहनत के बाद आग को पूरी तरह से बुझाया जा सका, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई। हालांकि, इस आगजनी में जंगल के कुछ हिस्से को नुकसान पहुंचा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय के जंगल में अक्सर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। यहां लोग बीड़ी और सिगरेट पीते हुए देखे जाते हैं। आशंका जताई जा रही है कि किसी ने जलती बीड़ी या सिगरेट फेंक दी होगी, जिससे सूखे पत्तों में आग लग गई और वह तेजी से फैल गई।
फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन इस घटना ने जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी की जरूरत को एक बार फिर उजागर कर दिया है। लोगों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जंगल क्षेत्र में नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।