कमिश्नर अनिल सुचारी ने जताई नाराजगी, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया जोर
सागर, 11 सितम्बर 2025
सागर संभाग में पशु चिकित्सा सेवाओं की प्रगति को लेकर मंगलवार को संभाग स्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में कमिश्नर श्री अनिल सुचारी ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि पशु टीकाकरण और उपचार कार्य की सतत मॉनीटरिंग की जाए और आवश्यक होने पर इनका सत्यापन भी कराया जाए।
कमिश्नर ने कहा कि संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए सतत निगरानी जरूरी है और पशुपालकों को सेवाएं सहज व पारदर्शी रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।

बकरी पालन, आचार्य विद्यासागर और चरीचरा योजना पर नाराजगी
बैठक के दौरान यह पाया गया कि –
- बकरी पालन योजना
- आचार्य विद्यासागर योजना
- चरीचरा योजना
का क्रियान्वयन अपेक्षित स्तर तक नहीं हो पाया है। इस पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रकरण समय पर तैयार कर बैंकों को भेजे जाएं, ताकि लाभार्थियों को योजनाओं का फायदा मिल सके।
चलित पशु चिकित्सा इकाइयों पर जोर
कमिश्नर ने जिलेवार समीक्षा करते हुए कहा कि –
- चलित पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से सेवाएं पारदर्शी और प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाएं।
- इन इकाइयों को और अधिक कारगर और सक्रिय बनाया जाए, ताकि पशुपालकों को गांव-गांव जाकर त्वरित सेवा मिल सके।

डेयरी और पशुपालन योजनाओं की समीक्षा
बैठक में कमिश्नर ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की –
- डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनू योजना
- मुख्यमंत्री डेयरी विकास योजना
- डेयरी प्लस योजना
उन्होंने निर्देश दिया कि इन सभी योजनाओं के प्रकरण समय पर तैयार कर बैंकों को भेजे जाएं और बैंकों के माध्यम से पशुपालकों को ऋण उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।

स्वावलंबी गौशाला योजना की समीक्षा
कमिश्नर ने स्वावलंबी गौशाला योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस योजना से न केवल गौवंश को संरक्षण मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इस योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए।
बैठक में शामिल अधिकारी
बैठक में संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं सागर संभाग डॉ. कल्पना तिवारी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
कमिश्नर अनिल सुचारी की सख्त हिदायत से यह साफ है कि अब सागर संभाग में पशु चिकित्सा सेवाओं की निगरानी और क्रियान्वयन की गति तेज होगी। इससे न केवल पशुओं को समय पर टीकाकरण और उपचार मिलेगा, बल्कि पशुपालकों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।