इंदौर। सिंहस्थ 2028 और आगामी पांच वर्षों की बढ़ती यात्री मांग को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इंदौर, लक्ष्मीबाईनगर, महू और उज्जैन सहित प्रमुख स्टेशनों पर अधोसंरचना विस्तार की व्यापक योजना बनाई है। रेलवे के अनुसार इंदौर–उज्जैन क्षेत्र में 7 नई पिट लाइन और 16 नई स्टेबलिंग लाइन विकसित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 21 प्राइमरी मेंटेनेंस और 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों सहित कुल 32 अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी।
रेलवे जनसंपर्क विभाग ने बताया कि अगले पांच साल में प्रमुख शहरों से नई रेलगाड़ियों के संचालन की क्षमता को वर्तमान स्तर से दोगुना करना आवश्यक है। इसके लिए स्टेशन बिल्डिंग निर्माण, नए प्लेटफॉर्म, पिट लाइन, स्टेबलिंग/होल्डिंग एरिया, कोचिंग सुविधाएं और स्टेशन विकास से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं।

इंदौर रेलवे स्टेशन
- स्टेशन बिल्डिंग का निर्माण शुरू हो चुका है, जिसे सिंहस्थ से पहले पूरा करने का लक्ष्य है।
- वर्तमान में इंदौर से 57 जोड़ी ट्रेनें प्रतिदिन संचालित होती हैं, जिनमें 41 जोड़ी ओरिजिनेट/टर्मिनेट होती हैं।
- अभी यहां 6 प्लेटफॉर्म और 5 पिट लाइन उपलब्ध हैं।
लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन
- वर्तमान में 4 स्टेबलिंग लाइन, 3 प्लेटफॉर्म और 1 शंटिंग नेक उपलब्ध है।
- दो नए प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं।
- 259 करोड़ रुपए की लागत से कोचिंग मेंटेनेंस डिपो का निर्माण किया जा रहा है।
- यहां 5 नई पिट लाइन, 7 स्टेबलिंग लाइन और सिक कोच लाइन बनाई जाएंगी।
- इससे प्रतिदिन 15 प्राइमरी मेंटेनेंस ट्रेनों की देखरेख संभव होगी और स्टेशन को इंदौर के दबाव को कम करने वाले सैटेलाइट टर्मिनल के रूप में विकसित किया जाएगा।
- स्टेशन भवन का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।
महू रेलवे स्टेशन
- वर्तमान में 4 प्लेटफॉर्म और 3 पिट लाइन उपलब्ध हैं।
- प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाने, ओएचई और प्लेटफॉर्म कनेक्टिविटी का कार्य चल रहा है, जिसे मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
- यहां से अभी 15 जोड़ी नियमित और 2 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन हो रहा है।
- स्टेशन को समेकित कोचिंग डिपो के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- पहले चरण में लगभग 94 करोड़ रुपए की लागत से 2 नई पिट लाइन बनाई जाएंगी, जिससे 6 ट्रेनों की मेंटेनेंस क्षमता बढ़ेगी।
- दूसरे चरण में सिक लाइन और स्टेबलिंग सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
उज्जैन जंक्शन
- सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए 9 नई स्टेबलिंग/होल्डिंग लाइन की योजना बनाई गई है।
- इससे करीब 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों को खड़ा करने और टर्मिनेट करने की क्षमता विकसित होगी।
- यार्ड रिमॉडलिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन कार्यों के पूरा होने से न सिर्फ सिंहस्थ के दौरान यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि भविष्य में बढ़ने वाले यात्री भार को भी सुचारु रूप से संभाला जा सकेगा।