मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन के बड़नगर तहसील अंतर्गत ग्राम बमनापानी निवासी दिव्यांग युवक अभिषेक सोनी का सपना आखिरकार साकार हो गया। क्रिकेट के प्रति जुनून रखने वाले अभिषेक ने इंदौर में हो रहे भारत–न्यूजीलैंड वनडे क्रिकेट सीरीज का मैच स्टेडियम में बैठकर देखने की इच्छा जताई थी। टिकट न मिलने पर उसने वीडियो के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई थी, जिस पर सीएम ने तुरंत संज्ञान लेते हुए उसके लिए टिकट की व्यवस्था करवाई।
दरअसल, दिव्यांग अभिषेक सोनी ने एक भावुक वीडियो जारी कर कहा था,
“मुख्यमंत्री जी प्रणाम, मेरा नाम अभिषेक सोनी है। मैं ग्राम बमनापानी में रहता हूं। मैं दिव्यांग हूं और मुझे क्रिकेट देखने का बहुत शौक है। मेरी इच्छा है कि मैं भारत का मैच लाइव ग्राउंड पर देख सकूं, लेकिन मुझे टिकट नहीं मिल पा रही है। कृपया मेरी मदद कीजिए।”

अभिषेक की इस अपील को उसके पिता और परिजनों ने उज्जैन कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाया। अभिषेक के पिता ने बताया कि उनका बेटा 32 वर्ष का है और बचपन से ही दिव्यांग है। इसके बावजूद क्रिकेट के प्रति उसका जुनून कम नहीं हुआ। वह गांव में टीवी पर भारत के लगभग हर मैच को देखता है और टीम इंडिया का जबरदस्त प्रशंसक है। उसकी लंबे समय से इच्छा थी कि वह एक बार स्टेडियम में बैठकर भारतीय टीम को खेलते हुए देखे, लेकिन टिकट व्यवस्था की जानकारी और उपलब्धता न होने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था।
जैसे ही यह मामला उज्जैन कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा, उन्होंने तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए अभिषेक के लिए इंदौर में आयोजित भारत–न्यूजीलैंड वनडे मैच का टिकट भिजवाया। टिकट मिलने के बाद अभिषेक की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह टीम इंडिया की जर्सी पहनकर इंदौर के होलकर स्टेडियम पहुंचा और लाइव मैच देखने का आनंद लिया।

गौरतलब है कि इंदौर के होलकर स्टेडियम में आज भारत और न्यूजीलैंड के बीच वनडे सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला खेला जा रहा है। इस रोमांचक मैच को देखने के लिए बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी अपने परिवार और दोस्तों के साथ स्टेडियम पहुंचे हैं। स्टेडियम के बाहर भारतीय टीम की जर्सी, तिरंगे झंडे और पसंदीदा खिलाड़ियों के नाम व नंबर वाली टी-शर्ट की जमकर बिक्री हो रही है।
अभिषेक सोनी के लिए यह मैच सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक सपना था, जो मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल से हकीकत में बदल गया। यह घटना प्रशासन की मानवीय सोच और आमजन से जुड़ाव का एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।